Traffic Police Station and Research Centre Soon in Sasaram
Traffic Police Station and Research Centre Soon in Sasaram : सासाराम शहर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू ढंग से चलाने के लिए डेडीकेटेड ट्रैफिक थाना खुलेगा । एसपी श्री आशीष भारती ने बताया कि पोस्ट ऑफिस चौराहा समेत अन्य चिन्हित स्थानों पर पर्याप्त ट्रैफिक पुलिस की तैनाती की जाएगी । ट्रैफिक पुलिस की तैनाती से जिला मुख्यालय में ट्रैफिक जाम की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।
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ट्रैफिक जाम से परेशानी
आपको बताते चलें की जिला मुख्यालय सासाराम में फिर से लोग जाम से काफी परेशान हैं । रोज-रोज लगातार जाम की वजह से विद्यार्थियों को स्कूल कॉलेज पहुंचने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है जबकि ऑफिस जाने वाले लोगों को भी लेट होने के लिए हमेशा अपने बॉस से डांट सुनना पड़ता है । यही नहीं कई लोग जो दूरदराज से चलकर सासाराम शहर में खरीदारी करने के लिए आते हैं, उन्हें भी जाम की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था ।
अच्छी पहल ,उम्मीद की किरण
लेकिन अब शहर में ट्रैफिक के संधारण को लेकर डेडीकेटेड ट्रैफिक थाना खोलने और अनुसंधान केंद्र खुलने से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है । यह केंद्र खुलने के बाद से शहरवासियों को जाम से मुक्ति मिलने की उम्मीद है ।
Traffic Diversion Dharamshala Market : सासाराम शहर में ड्रेनेज निर्माण से आए दिन दुर्घटनाएं की खबरें आम बात हो चुकी हैं । लगभग 2 वर्षो से कछुआ गति से चल रहे ड्रेनेज निर्माण के कारण जाम की समस्या से शहरवासियों को प्रतिदिन दो चार होना पड़ता है । अब ड्रेनेज निर्माण का काम शहर के सबसे व्यस्तम इलाका में पहुंच चुका है । जी हां, सही पढ़ा आपने … धर्मशाला रोड को बीच से काट दिया गया है ।
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धर्मशाला रोड मोड़ पर ड्रेनेज निर्माण
Dharamshala Market Sasaram
ड्रेनेज निर्माण के कारण सासाराम का शॉपिंग हब यानी धर्मशाला रोड पूरी तरह से प्रभावित हो गया है । अगर आप सीधी राह पकड़ कर यहां जा रहे हैं तो जरा संभल जाइए , क्योंकि आप सीधी राह से धर्मशाला मार्केट में नहीं जा सकेंगे ।
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दरअसल , धर्मशाला मार्केट को जीटी रोड से जोड़ने वाला हिस्सा काटा जा चुका है । बाईक या 4 पहिया वाहन कुछ दिनों तक इस रास्ते से बिल्कुल नही जा सकेंगे ।
Drainage construction sasaram
पैदल यात्री किनारे किनारे अंकुर होटल , गोपाल होटल के नीचे नीचे से धर्मशाला मार्केट के तरफ निकल सकते हैं लेकिन भीड़ और कीचड़ में पैर फिसलने का जोखिम बना रहेगा ।
क्यूं करते हैं चिंता ? जब हम हैं आपके साथ
“सासाराम कि गलियां” से जुड़े प्यारे शहरवासियों को कोई परेशानी नहीं हो , इसलिए हम आपको धर्मशाला मार्केट जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग बताने जा रहे हैं । जिसे जानकर आप न सिर्फ आराम से शॉपिंग कर सकेंगे, बल्कि आपके समय का भी बचत होगा । आपमेसे कई लोग इन रास्तों को पहले से जानते होंगे लेकिन बहुत सारे ऐसे भी लोग हैं जिनका दिमाग ट्रिगर नहीं कर पा रहा होगा , या कई लोग शॉर्टेस्ट पाथ का निर्णय ले पाने में असक्षम होंगे । खास कर वो लोग जो सासाराम के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानते है , यहां पर नौकरी करते हैं या परीक्षा देने आए हैं ।
वैकल्पिक मार्गों का ऐसे करें प्रयोग | Traffic Diversion Dharamshala Market
धर्मशाला मोड़ से
अगर आप धर्मशाला मोड़ पहुंच चुके हैं तो ठीक बगल में स्थित ठाकुर मार्केट वाले रास्ता का उपयोग कीजिए । दिन में इस रास्ते से 4 व्हीलर नहीं जा सकती है, लेकिन पैदल यात्री और 2 व्हीलर आराम से चले जाएंगे ।
Dharamshala Market Sasaram
गोला , चौक बाज़ार के रास्ते से
अगर आप पीछे के रास्ते से आ रहे हैं और जीटी रोड पकड़ना चाहते हैं तो सबसे पहले चौखंडी मोड़ पहुंचिए और जीटी रोड पकड़ने के लिए कृपया ठाकुर मार्केट वाले रास्ते पर अनावश्यक लोड मत बढ़ाइए , क्युकी इस रास्ते में अगर जाम लग गया तो समझिए कल्याण हो गया ।
इसलिए चौखंड़ी मोड़ पहुंच कर सोचिए आपको किधर जाना है ? यदि आपको पोस्ट ऑफिस तरफ जाना है तो करण सराय , अड्डा रोड होते हुए निकल जाइए ।
यदि आपको न्यू एरिया जाना है तो सिटी मॉल के रास्ते से कुशवाहा भवन वाली गली से होते हुए जीटी रोड पकड़ सकते हैं । या आप सीधा दुर्गा मंदिर बौलिया रोड निकल सकते हैं । इन रास्तों से ट्रैफिक तथा खराब रास्तों की परेशानियों से जूझते हुए 2 व्हीलर और 4 व्हीलर पार हो सकते हैं। मतलब आप गाड़ी लेकर मंजिल तक पहुंच जाइएगा ।
कंपनी ने समस्या से निजात दिलाने का भरोसा दिया है
Drainage construction budco sasaram
ड्रेनेज निर्माण कंपनी बुडको के एक अधिकारी ने बताया की , धर्मशाला मार्केट के महत्व को देखते हुए जल्द से जल्द नाला निर्माण का कार्य पूरा करने की कोशिशें की जा रही है । हमारे ऊपर इस मार्ग को लेकर दबाव भी है । उम्मीद है की आने वाले कुछ ही हफ्तों में नाला के ऊपर रास्ता बनने से पहले कि तरह आवागमन बहाल हो जाएगा ।
National Environment Youth Parliament 2022 Trishi : सासाराम निवासी और दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीयूएसबी की छात्रा तृषि इस बार राजधानी दिल्ली में 27 फरवरी 2022 को आयोजित होने वाले राष्ट्रिय पर्यावरण यूथ संसद 2022 का प्रतिनिधित्व करेंगी ।
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सासाराम के सोनहर गांव की निवासी
तृषि सासाराम अनुमंडल अंतर्गत सोनहर गांव के श्री उदय पांडेय कि सुपुत्री हैं ।
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छत्तीसगढ़ में जोनल लेवल पर बेहतर प्रदर्शन
सीयूएसबी के उप-कुलानुशासक-सह-विश्वविद्यालय के नोडल ऑफिसर डॉ. प्रणव कुमार ने “सासाराम कि गलियां” को बताया कि राष्ट्रीय पर्यायवरण यूथ संसद 2022 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभागियों को चयनित करने के लिए गुरु घासीदास विश्वविद्यालय , बिलासपुर (छत्तीसगढ़) में जोनल लेवल पर पर्यायवरण यूथ संसद का आयोजन 23 जनवरी 2022 को किया गया था ।
12 केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के 71 प्रतिभागियों में से तृषि का सलेक्शन
इस कंपटीशन में देशभर के 12 केंद्रीय विश्वविद्यालयों के 71 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। तृषा ने इस प्रतियोगिता में बेहतरीन प्रदर्शन किया है ।
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राष्ट्रीय लेवल पर तृषि का सलेक्शन | National Environment Youth Parliament 2022 Trishi
छत्तीसगढ़ में हुए जोनल लेवल प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर के लिए सीयूएसबी की तृषि के साथ 10 अन्य प्रतिभागियों ने सफलता प्राप्त किए हैं । डॉ. प्रणव कुमार ने Sasaram Ki Galiyan को बताया की राष्ट्रिय लेवल के प्रतिभागियों का चयन एक निर्णायक मंडल द्वारा किया गया है।
बचपन से ही नेतृत्व क्षमता की धनी है तृषि
तृषा के पिता जी श्री उदय पांडें ने बताया की तृषि बचपन से लीडरशिप क्वालिटी के मामले में और बच्चों से अलग थी । कई जगहों पर इनकी इस क्वालिटी की सराहना हुई है । स्कूली शिक्षा के दौरान भी तृषि अपने विद्यालय के विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेती थी और अच्छा प्रदर्शन करती थीं ।
केन्द्रीय युनिवर्सिटी में खुशी की लहर
राष्ट्रिय स्तर के प्रतियोगिता में तृषि का चयन होने पर विश्वविद्यालय के सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह, छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. आतिश पराशर, कुलसचिव कर्नल राजीव कुमार सिंह, कुलानुशासक प्रो. उमेश कुमार सिंह ने बधाई दी है ।
शहर का मशहूर फैमली रेस्टोरेंट , द स्टंप रेस्टोरेंट नय साल में स्वाद प्रेमियों पर विषेश मेहरबानी करने के मूड में आ गया है । दरअसल , इस फैमिली रेस्टुरेंट ने अचानक से भारी कॉस्ट कटिंग कर दिया है । कई आइटमों के दाम 30 -40% तक कम हो गए हैं ।
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महामारी और लॉकडॉउन का बिजनेस पर असर
प्रोपराइटर राजेश जी बताते हैं की , कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने स्टार्टअप्स को बहुत प्रभावित किया है । इन्होंने युवा अवस्था में स्वरोजगार के तरफ कदम बढ़ाया है, शुरुआत से ही तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।
महंगाई ने बांधे हाथ , फिर भी कॉस्ट कटिंग के लिए आगे आए
लॉकडाउन के बाद जिस तरह से पेट्रोलियम प्रोडक्ट, माल ढुलाई और खाद्य पदार्थों के दामों में बेतहसा वृद्धि हुई है ऐसे में आम आदमी के पास बजट की भी कमी हो गई है । आज के समय में उद्योग धंधा बंद होने से बाजार में पैसा नहीं है ।
राहत देने के उद्देश्य से प्राइस कट
प्रोपराइटर का कहना है कि महंगाई के दौर में शहरवासियों को स्वाद के मामले में राहत देने के उद्देश्य से हेवी प्राइस कट किया गया है ।
फैमिली रेस्टुरेंट में साफ सुथरा वातावरण
रेस्टुरेंट प्रोपराइटर कहते हैं की सासाराम के लोगों के लिए साफ सुथरा और कंफर्टेबल वातावरण देना उनका मुख्य उद्देश्य था, इसलिए इन्होंने ओपन स्पेस में ही पूरा रेस्टोरेंट को रखा है ।
Stump Restaurant
50-70 व्यक्तियों का कैपेसिटी वाला एक इंडोर हॉल भी है , जिसे छोटे मोटे पार्टियों इत्यादि के लिए डेडीकेटेड किया गया है । लोग प्राइवेसी के साथ अपने स्वजनों के बीच धूमधाम से बर्थडे पार्टी, एनिवर्सरी,ऑफिस पार्टी इत्यादि मनाते हैं ।
इनके यहां बंद केबिन नहीं है, फैमली प्रायोरिटी है
ज्यादातर कैफे और रेस्टोरेंटो का बिजनेस मॉडल बंद केबिनों ,प्राइवेट कपल केबिनों पर आधारित रहता है। अधिकांस रेस्टोरेंट सिर्फ इसी के बल बूते पर जीवित रह पाते हैं । प्राइवेट केबिनों से बहुत फायदा होता है ।
Family Court Stump Restaurant
फिर भी इन सब चीजों को दरकिनार करके स्टंप रेस्टोरेंट को फैमिली रेस्टोरेंट के रूप में स्थापित किया गया है, यहां कोई प्राइवेट कपल केबिन नहीं है, जिसका दरवाजा आप बंद कर सकते हैं या कम रौशनी में पर्दा लगा सकते हैं । यह खासियत स्टंप रेस्टोरेंट को भिड़ से अलग बनाता है ।
ट्रेंड शेफ बनाते हैं 50 से अधिक आइटम
Stump Restaurant, sasaram Bihar
ट्रेंड और एक्सपीरियंस शेफ रेस्टोरेंट में खाना तैयार करते हैं , नॉर्थ इंडियन ,साउथ इंडियन, कॉन्टिनेंटल सहित कई अन्य कैटेग्रियों और सब कैटेग्रियों के अंदर लगभग 50 से अधिक प्रीमियम आईटम्स इनके यहां उपलब्ध है ।
पिज्जा @129 और खास पसंद
Pizza Stump Restaurant
रेस्टोरेंट के ओपनिंग के समय से ही स्टंप रेस्टोरेंट का ₹129 वाला किफायती पिज्जा यंगस्टर्स का पहला पसंद बन गया । दूर दराज के मोहल्लों के युवा व व्यस्क इस पिज्जा के लिए सिविल लाइंस के सामने आशीर्वाद होटल के नीचे स्थित स्टंप रेस्टोरेंट में आते हैं ।
कई तरह का सूप , लोगों को खूब लुभाता है
स्टंप रेस्टोरेंट अपने स्वादिष्ट सूप के लिए भी जाना जाता है । वेज और नॉनवेज दोनों तरह के सूप यहां उपलब्ध है ।
कई आइटमों के स्पेशल ग्राहक
पनीर कड़ाही , कबाब और नूडल्स के खास रिज़र्व ग्राहक हैं । ये लोग सिर्फ यही खाने आते हैं और बार बार आते हैं । किफायती और टेस्टी होना इसका प्रमुख कारण है ।
पॉकेट फ्रेंडली आइटम, सुरक्षित कंफर्टेबल वातावरण और आकषर्क इंटीरियर प्रायोरिटी
Stump Restaurant
रेस्टोरेंट प्रोपराइटर कहते हैं की पढ़ाई के बाद जब उन्होंने स्वरोजगार के लिए सोचा तब ही उनके मन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम दाम में अच्छे सर्विसेज देना , प्राइवेट कपल केबिन बिजनेस मॉडल के फायदों का त्याग कर फैमिली के लिए साफ सुथरा कंफर्टेबल वातावरण देना फर्स्ट प्रायोरिटी था । इंटिरियर और स्टैंडर्ड पर भी खास ध्यान दिया गया है ।
यात्रियों की सुविधा को देखते हुए हाजीपुर जोन द्वारा 25 जनवरी यानी आज से 12323 को सप्ताह में दो दिन चलाने का आदेश जारी किया गया है। जबकि गाड़ी संख्या 12324 को 29 जनवरी से सप्ताह में दो दिन चलाने का निर्णय हुआ है ।
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किस किस दिन चलेगी ट्रेन
आपको बताते चलें की हावड़ा बाड़मेर हर सप्ताह में अप जर्नी के लिए मंगलवार और शुक्रवार को चलेगी। जबकि डाउन जर्नी के लिए बुधवार और शनिवार को चलेगी ।
क्या ट्रेन का टाइम भी बदला है ?
अगर यह सवाल आपको चिंतित कर रहा है तो , हम साफ करदें की रेलवे के तरफ से हावड़ा बाड़मेर ट्रेन के ठहराव टाइमिंग और कोच में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
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हावड़ा बाड़मेर ट्रेन पर विषेश जानकारी
“सासाराम कि गलियां” आपके लिए विषेश जानकारी देने जा रहा है, ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों को ये बातें जरूर मालूम होनी चहिए । 62 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चलने वाली गाड़ी संख्या 12323 हावड़ा बाड़मेर ट्रेन, हावड़ा जंक्शन से 06:50 बजे निकलती है और 07:05 बजे बाड़मेर पहुँचती है। हावड़ा बाड़मेर ट्रेन कुल 36घंटो और 15 मिनटों में यह सफ़र तय करती है । इतने समय में यह ट्रेन 2278 किलोमीटर की दूरी तय करती है ।
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यात्रा के दौरान 21 स्टेशनों पर रुकती है। पुरानी दिल्ली स्टेशन पर यह ट्रेन सबसे लंबे समय तक रुकती है । यहां पर यह ट्रेन अधिकतम 25 मिनट तक रुकती है । इस ट्रेन में 1A,2A,2S,3A,SL श्रेणी की सीटें उपलब्ध हैं GN,TQ,SS,LD कोटा का उपयोग करके इस ट्रेन में टिकट बुकिंग किया जा सकता है ।
सासाराम के यात्रियों के लिए खास बात
गया डीडीयू के रास्ते चलने वाली हावड़ा बाड़मेर ट्रेन सासाराम जंक्शन पर नहीं रुकती है । लेकिन सासाराम के बहुत सारे लोग इस ट्रेन का उपयोग करते हैं । इस ट्रेन पर सफर करने के लिए सासाराम के यात्री गया या दिन दयाल उपाध्याय जंक्शन से इस ट्रेन को पकड़ते हैं । यह ट्रेन हमारे स्टेशन पर भले ही नहीं रुकती है , लेकिन हमारे ही रूट से चलती है और हमारे बहुत सारे लोग इस ट्रेन का उपयोग करते हैं , इसलिए इससे सम्बन्धित खबर को प्रमुखता दिया गया ।
क्या कहते हैं आधिकारी ?
हाजीपुर जोन के जनसंपर्क अधिकारी श्री राजेश कुमार ने Sasaram Ki Galiyan को बताया कि हावड़ा बाड़मेर ट्रेन में यात्रियों की बढ़ती हुई संख्या और टिकट मिलने से वंचित रह जा रहे यात्रियों की परेशानियों को देख कर ,समस्या के समाधान हेतु रेलवे ने सप्ताह में दो दिन हावड़ा बाड़मेर ट्रेन परिचालन करने का निर्णय लिया है।
Gyms and children parks soon in sasaram : अगर आप वर्क फ्रॉम होम में सासाराम आए हुए हैं और आपका वर्कआउट रूटीन गड़बड़ हो गया है या सासाराम में ही रहते हैं लेकिन अच्छे सुविधाओं के लिए तरसते हैं तो आपके लिए खुशखबरी है । सासाराम शहर को कई नए उपहार मिलने वाले हैं । इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है ।
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7 जगहों पर जिम और चिल्डेंस पार्क
सासाराम शहर में नेहरु पार्क, पानी रौजा, रौजा रोड गेट, फजलगंज स्टेडियम, सम्राट अशोक भवन तथा डीएम कॉलोनी में ओपन जिम बनाए जाएंगे , तथा एक इंडोर जिम शुरू होगा , जो की फजलगंज के खेल भवन में होगा ।
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3 जगहों पर जिम के साथ पार्क भी
डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने Sasaram Ki Galiyan को बताया की ताराचंडी मंदिर, शेरशाह रौजा , रौजा गेट के पास ओपन जिम के साथ छोटे बच्चों के खेलने के लिए जोम्बो चाइल्ड गेम, रोलर स्लाइडर, सी सा और झूले लगेंगे । डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने बताया कि पार्क में टहलने के लिए वाकिंग ट्रैक भी रहेगा ।
खेल भवन फजलगंज रेडी है
khel bhawan fazalganj sasaram
विधनसभा चुनाव से पहले हमने बताया था की लगभग 6.50 करोड़ की लागत से बनने वाला खेल भवन का काम अपने अंतिम फेज में है । अगर आपने उस समय , इस खबर को नहीं पढ़ा था तो मेरे ऊपर क्लिक करके पढ़ लीजिए**
वह खेल भवन भी अब आम लोगों को सेवा देने के लिए तैयार हो चुका है । जल्द ही उसमे मल्टी जिम के लिए उपकरण लगाने की प्रक्रिया शुरू होने वाली है । ये सारा काम एक साथ ही होना है ।
न्यू ईयर के मौके पर डीएम ने कमिटमेंट दिखाया था
न्यू ईयर से ठीक पहले जब मैं मनीष मौर्या ( “सासाराम कि गलियां” का फाउंडर) डीएम धर्मेन्द्र कुमार से मिला था तब उन्होंने इन सब विषयों पर विस्तार से बताया था और उन्होंने कहा था की “शहर के लिए अपना 100%” दूंगा , इस शहर के अच्छे लोगों के कारण मुझे इस शहर से विशेष लगाव हो गया है ।
डीएम धर्मेंद्र कुमार और “सासाराम कि गलियां” के संस्थापक मनीष मौर्या | यह तस्वीर 30 दिसंबर 2021 की मुलाकात की हैं
तब टेंडर प्रक्रिया अपने प्लानिंग के फेज में था, इसलिए हमने उस समय इस खबर को नही बताया था । अब चूंकि टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है, और यह काम मौखिक रहने के बदले कागजों पर उतर गया है , इस खबर को बताया जा रहा है ।
डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने Sasaram Ki Galiyan को बताया की शहर में एक भी पार्क नहीं होने के कारण , बार बार उन्हें यह समस्या समाधान के लिए आकर्षित करती है , और वह इस समस्या को दूर करने के लिए कमिटेड हैं । नेहरू पार्क को नगर का मुख्य रिक्रिएशन प्लेस बनाने हेतु उन्होंने निर्देश दिया है ।
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मां ताराचण्डी धाम के पास पार्क
माँ ताराचंडी धाम के समीप स्थित पार्क एवं धाम के पृष्ठवर्ती पथों के सौंदर्यीकरण हेतु भी आवश्यक निदेश जिलाधिकारी द्वारा दिया गया है । डीएम ने कुछ दिनों पूर्व स्थल का मुआयना किया था ।
सम्राट अशोक भवन का सौंदर्यीकरण
सम्राट अशोक भवन का निरिक्षण करते हुए डीएम धर्मेंद्र कुमार
सासाराम, पुराने थाने के समीप स्थित अशोक कन्वेंशन हॉल के अपस्केलिंग एवं सौंदर्यीकरण का निर्देश भी जिलाधिकारी द्वारा दिया गया है ।
सासाराम के लोगों से डीएम ने अपील किया है
नेहरू पार्क का निरीक्षण कार्य
डीएम धर्मेन्द्र कुमार ने समस्त सासाराम नगरवासियों से भी अपील किया है कि सासाराम एक पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व का शहर है । इसे साफ-सुथरा, अतिक्रमण- मुक्त, स्वच्छ एवं सुंदर बनाने तथा उक्त सौंदर्य को निरंतर मेन्टेन रखने हेतु सभी नगरवासियों विशेषकर युवाओं को आगे आना होगा तभी राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन द्वारा इस दिशा में किये जा रहे प्रयास सार्थक और सफल होंगे।
Spot Billing Service Electricity Dept Sasaram : सासाराम शहर के सभी उपभोक्ताओं को सूचित किया जाता है मीटर रीडर के द्वारा आपके परिसर पर स्पॉट बिलिंग किया जा रहा है एवं विशेष बात यह है कि जनवरी 2022 से आप अपने विद्युत विपत्र का भुगतान मीटर रीडर के माध्यम से भी कर सकते है ।
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विभाग ने संसाधन उपलब्ध करा दिया है
इसके लिए विभाग की तरफ से मीटर रीडर को रियल टाइम पी.ओ.एस मसीन उपलब्ध करा दी गई है। पैसा जमा करते समय कंप्यूटर जेनरेटेड पावती रसीद मीटर रीडर से अवश्य मांग ले ।
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कैशलेस पेमेंट की सुविधा
आप बिजली बिल का भुगतान नगद अथवा ए.टी.एम. कार्ड, डेबिट कार्ड या यूपीआई के माध्यम से कर सकते है। जो उपभोक्ता अपने बिजली बिल का भुगतान प्रतिमाह नहीं करते है, विभाग के द्वारा उनके विरूद्ध सख्त कार्यवाई करते हुए उनका विद्युत संबंध विच्छेद किया जा रहा है। इसके लिए सघन जॉच अभियान चलायी जा रही है ।
बिजली चोरों पर होगी कार्यवाई
गलत तरीके से अवैध बिजली का उपयोग करते हुए पाये जाने पर भारतीय विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 के तहत आपके विरूद्ध आर्थिक दण्ड लगाते हुए कानूनी कार्यवाई की जाएगी। बिजली चोरी एक दण्डनीय अपराध है।
ईमानदारी के मिसाल, शिक्षाविद् एवं लोकप्रिय समाजसेवी काॅमरेड रामकृत सिंह का जन्म 15 जनवरी 1935 को बिहार के शाहाबाद जिला(वर्तमान कैमूर) के एक छोटे से गांव बिड्डी में अत्यंत गरीब किसान परिवार में हुआ था। इनका पैतृक निवास सुहावल (चैनपुर) था लेकिन कुछ अप्रिय घटना के बाद इनके दादा जी स्व. रामरेखा सिंह के समय में ही पारिवारिक स्थानांतरण बिड्डी में हुआ।
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अंबेडकरवादी विचार के सिपाही Comred ramkrit singh
अम्बेडकरवादी विचारधारा से ओतप्रोत ये सेवानिवृत्त पंचायत सचिव सह तहसीलदार(पंचायती राज विभाग,बिहार सरकार), पूर्व वरिष्ठ सदस्य(लोक शिक्षा समिति,चैनपुर), संस्थापक सदस्य (सहकारिता समिति,चैनपुर), पूर्व पैक्स प्रत्याशी( जगरियां पंचायत) तथा प्रखर वक्ता हैं।
इनके पिता का नाम स्व. सरयू सिंह एवं माता का नाम स्व. जीवरानी देवी था। जब ये महज छः महीने के थे तो इनकी मां का देहांत(जून 1935) हो गया। इनका बचपन बिना मां के निर्धनता के उस कठिन परिस्थिति में गुजरा है !
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पिताजी की दूसरी शादी न होने की सूरत में इनका पालन-पोषण वृद्ध दादी-मां स्व.भाग्यवानी देवी द्वारा हुआ। कभी- कभी दादी-मां के बीमार हो जाने पर खाना नहीं मिलता था तो उन्हें भूखे स्कूल जाना पड़ता था।
परिवार की ऐसी दयनीय हालत देखते हुए जब वे संस्कृत उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय,चैनपुर में कक्षा तीन (1948) में पढ़ते थे तभी उनकी पहली शादी हो गयी। कक्षा पांच (1950) में जाने के बाद दुर्भाग्यवश पत्नि का देहांत हो गया।
पैसों की कमी से पढ़ाई को लगा विराम
इसके बाद भी वो अध्ययनरत रहें फिर पांचवी कक्षा पास करने के बाद वे प्रखंड के इकलौते गांधी स्मारक मध्य विद्यालय, चैनपुर में कक्षा छः में दाखिला लिये लेकिन परिवार की चरमराती आर्थिक स्थिति की सूरत में महज “एक आना” शुल्क न चुका पाने के कारण आठवीं कक्षा में पढाई रुक गई।
इन्हे पढ़ाने के लिए बड़े बाऊ जी सासाराम में पोलदारी करने लगे
लेकिन इनके बडे़ पिताजी स्व.वैजनाथ सिंह(मालिक) ने कहा कि तुम अध्ययन जारी रखो मैं फीस का इंतजाम करता हूं तो वो सासाराम में पोलदारी करने लगे जिससे इनकी पढाई पुनः शुरु हो गयी और मध्य विद्यालय पास कर जब उसी साल नवनिर्मित गांधी स्मारक उच्च विद्यालय,चैनपुर में कक्षा नौ(1954) में एडमिशन लिये तभी पुनः उनकी दूसरी शादी स्व. बचानी देवी से हुई।
गांव के पहले मैट्रीकुलेट
Comred ramkrit singh ,Kaimur
अल्पव्यस्क अवस्था में दो बार शादी होने, प्रतिकूल सामाजिक व पारिवारिक परिस्थिति तथा लाख आर्थिक तंगी के बावजूद ‘अनलाइक अदर्स’ अपने लगन, संकल्प और जुनून के बल पर सन् 1956 में सेकेंड डिविजन से मैट्रीक परीक्षा(वर्ग-11) में उत्तीर्ण होकर अपने पूरे खानदान ही नहीं बल्कि गांव-पडो़स के पहले मैट्रीकुलेट हुए।
पढ़ाई की अहमियत को समझा
अपने क्षेत्र में इस सफलता पर मिली इज्जत और सामाजिक पहचान इनकी विराट शख्सियत के शुरुआत की शंखनाद थी। वर्तमान समय में भले हीं यह एक डिग्री मात्र है लेकिन उस जमाने में जब पढा़ई का कोई रिवाज नहीं था ग्रामीण परिवेश में वो भी अत्यंत निर्धन परिवार से मैट्रीक में “सेकेण्ड डिविजन” लाना (जब अधिकांश लोग पढ़ाई लिखाई भी नहीं करते थे) अपने आप में पीएचडी करने के बराबर था।
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पंचायत के लोगों के साथ-साथ उन्हें अपने शिक्षकों श्री शंकर पांडेय(प्रधानाचार्य), मेवा सिंह तथा किशोरी सिंह(ट्यूशन टीचर) से काफी सराहना, सम्मान और आशीर्वाद मिला लेकिन वो यहीं नहीं रुकना चाहते थे, स्नातक करना चाहते थे, कानून(लाॅ) की पढा़ई करना चाहते थे परन्तु उच्च शिक्षा के लिए स्थानीय(भभुआ अनुमण्डल) काॅलेजों की नगण्यता, व्यक्तिगत-पारिवारिक जिम्मेवारी तथा बदहाल आर्थिक परिस्थिति अध्ययन को पूर्णतः ब्रेक लगा दिया।
विवशतावश् इसी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर वे नौकरी तलाशने लगे इसी दौरान तेजी से बिगड़ती आर्थिक स्थिति की वजह से उन्हें इसी अवस्था(21वर्ष) में एक साल के लिए कमाने कलकत्ता भी जाना पडा़ तभी 1956-57 में सहकारिता विभाग में कोओपरेटिव सुपरवाइजर पद के लिए भर्ती निकली लेकिन इनकी मेरिट भ्रष्टाचार के भेट चढ़ गया ।
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नौकरी मिल ही गई
सौभाग्यवश उसी साल बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग में पंचायत सचिव के पद के लिए भर्ती निकली। अंततः 1958 में अपने अथक प्रयासों से आरा समाहरणालय में परीक्षा के बाद पंचायत सचिव के पद पर बहाल हुये और सिविल विभाग में सरकारी नौकरी करने वाले अपने गांव के पहले शख्स हुए।
गांव में प्राथमिक विद्यालय खोलवाया
उन्होंने अपने शिक्षा और व्यक्तिगत उत्थान को सिर्फ अपने तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि नौकरी के शुरुआती समय में हीं अपने गांव में एक प्रथामिक विद्यालय की स्थापना हेतु प्रशासनिक स्तर पर पहल किया और इस प्रस्ताव को उन्होने प्रखंड पंचायत समिति के बैठक में स्वीकृत कराकर तथा ग्रामीणों के समग्र सहयोग से प्राथमिक विद्यालय, बिड्डी का शिलान्यास कराया।
जातिवाद, निरक्षरता एवं निर्धनता के दंश ने उन्हें समाज सेवा एवं शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए प्रभावित किया और उनके इस अद्भूत योगदान की वजह से गरीब, दलित और पिछडे़ ,समाज के लोग उन्हें ग्रामीण सामाजिक एवं शैक्षणिक आंदोलन के अग्रदूत तथा “आधुनिक अम्बेडकर” जैसे नामों से सम्बोधित करने लगे।
कॉमरेड रामकृत सिंह का पैतृ
जब व्यक्ति का कद उसके पद से बडा़ होने लगे तब वह अपनी अद्वितीय ‘पर्सनालिटी’ के लिए मशहूर होने लगता है। प्रशंसक इनकी ईमानदारी, स्पष्टवादिता, निडरता, परोपकारिता, उदारता, सादगी-सहजता, सत्यवादिता तथा मानवता के कायल हैं। ग्रामीण जनता इन्हें ‘ तहसीलदार साहब’ के नाम से जानती है ये “शिक्षा का आंच” ही है कि लोग इनका नाम लेकर नहीं पुकारते हैं।
40 रूपए वेतन से घरेलू खर्च के साथ नई पीढ़ी को पढ़ाया
Comred ramkrit singh ,Kaimur
चालीस रुपये प्रतिमाह की सरकारी सेवा पर लगभग 20 सदस्यीय एक वृहत संयुक्त परिवार का अकेले आर्थिक वहन करते हुए अपने बेटे श्री ओमप्रकाश सिंह को इलाहाबाद विश्वविद्यालय(AU) से लाॅ पढाना तथा एक राजपत्रित पदाधिकारी(अभियोजन पदाधिकारी,गृह विभाग) बनाना अनुकरणीय एवं प्रशंसनीय है ।
समाज के प्रति भी जिम्मेवारी निभाई
इसके बावजूद की वे समाज के प्रति उतने ही जिम्मेदार थे जितना परिवार के प्रति जो सामान्यतः कम देखने को मिलता है। उनका पूरा जीवन त्याग और समर्पण से ओतप्रोत है और वो हमेशा कहते भी हैं “हम दुनिया में जो कुछ अर्जित करते हैं, उससे नहीं अपितु जो कुछ त्याग करते हैं उससे समृद्ध बनते हैं”।
अम्बेडकरवादी तथा बौद्ध चेतना के प्रचारक
उनके अंदर बचपन से नेतृत्व करने की क्षमता थी अपने सेवा के दौरान अनेक तरह की सामाजिक कुरीतियों से लड़ने के बाद उन्होने दलित समाज के उत्थान के लिए अम्बेडकरवादी तथा बौद्ध चेतना का प्रचार-प्रसार किया और लोगों को शिक्षा का महत्व समझाया। वे कहते थे कि “गरीबी में पैदा होना उतनी बुरी बात नहीं जितना गरीबी में मर जाना।”
जातिसूचक शब्द कहने पर बीडीओ को सबक सिखाया
उनके निडरता के किस्से बचपन से ही सुनने को मिलते हैं नौकरी के दौरान हीं एक BDO द्वारा जातिसूचक अभद्र व्यवहार पर उन्होंने उसे दौडा-दौडाकर पीटा था ऐसे और कई किस्से हुये। जमींदार,अधिकारी, नेताओं के बीच इनकी ईमानदार और निडर रवैया चर्चा का विषय बना हुआ था।
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क्रांतिकारी व्यक्तित्व
भ्रष्ट लोगों के लिए भय का नाम हो गया कामरेड रामकृत सिंह। पोस्टिंग के वक्त ही प्रखंड विकास पदाधिकारी और अन्य कर्मचारीगण सहम जाते थे। इस चक्कर में वो तीन बार (1992-93) जेल भी जा चुके हैं। अंततः अनेकों विभागीय-प्रशासनिक कार्यवाही के बाद 29 फरवरी 1996 में 37 वर्षीय सेवा के उपरांत सेवानिवृत हो गये।
कई लोग मानते हैं आदर्श
इनकी शिक्षा तथा नैतिकता से प्रभावित और अपना आदर्श मानने वाले प्रमुख लोगों में श्री किशुन राम(सेवानिवृत शिक्षक), श्री वीरभगत सिंह(सिनियर एडवोकेट,इलाहाबाद हाईकोर्ट), राधेश्याम सिंह(सिनिर लेक्चरर, किसान इंटर कालेज), तथा अन्य। आज भी लोग अपनी सफलता का श्रेय इन्हें हीं देते हैं। इनके अजीज मित्रों में नौघरा के स्व.रामसूरत राम(जिला जज),स्व. लालमुनी चौबे(केन्द्रीय मंत्री), अमेरिका के पीटर बाबु(प्रोफेसर,शिकागो विश्वविद्यालय) जगरियां के स्व. जयदेव सिंह (जमींदार, मुखिया), अमांव के स्व.रामअधार सिंह(प्रखंड प्रमुख), इंसिया के स्व. रामसूरत सिंह(मुखिया तथा पटेल कालेज के भूमिदाता), नुआंव के स्व.लक्ष्मन खरवार(प्रखंड प्रमुख), का० रामबचन कुशवाहा(मुखिया सह प्रखंड प्रमुख), तथा अन्य।
ईमानदारी के मिशाल
Comred ramkrit singh ,Kaimur
एक दफा बडे़ भावुक होकर कहते हैं कि जब मैं दुनिया से चला जाउंगा तो अपने समाज परिवार के लिए धरोहर स्वरुप सिर्फ “ईमानदारी” छोड़ जाउंगा क्योंकि मैंने सिर्फ यही कमाया है धन सदा मेरे लिए गौण रहा। बेइमानी से धन-संचयन के संबंध में इनका एक प्रसिद्ध कथन है कि “पूत कपूत त क्यों धन संचे, पूत सपूत त क्यों धन संचे” अर्थात् अगर बेटा कुपुत्र है तो उसके लिये धन संचय क्यों किया जाय, वो तो उसे गलत कामों मे उडा देगा और अगर पूत सपूत है तब भी धन क्यों संचय किया जाय वो तो स्वयं अपनी काबलियत से आप से अधिक कमा सकेगा ।
लगभग 2 वर्षो से चला आ रहा सासाराम पुलिस और अपराधी के बीच आंख मिचौली का खत्म हो गया । सासाराम नगर थानान्तर्गत दिनांक 19.09.2019 को राजकुमार चौधरी, सा०-खिड़की घाट, थाना-सासाराम नगर, जिला-रोहतास की हत्या अपराध कर्मियों के द्वारा गोली मारकर कर दिया गया था।
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चाय दुकान पर हुआ था शहर का बहुचर्चित मर्डर
यह घटना शहर के खिड़की घाट मोहल्ला में शिव मंदिर के पास एक चाय दुकान पर हुआ था । जहां उसी मोहल्ले के निवासी राजकुमार सुबह साढ़े पांच बजे चाय पीने के लिए पहुंचे थे। उस समय मोहल्ले के दस लोग चाय दुकान पर मौजूद थे ।
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बाईक सवार अपराधियों ने सुबह सुबह मारी 3 गोलियां
दुकान के पास दो बाइक पर सवार होकर पहुंचे पांच अपराधियों ने 62 वर्षीय राजकुमार की तीन गोली मारकर हत्या कर दी ।
गोली मार कर फरार हुए अपराधी
उसके बाद अपराधी शाहजलाल पीर के रास्ते भाग निकले। भागने के दौरान अपराधियों की बाइक से कुचलकर उसी मोहल्ले की एक किशोरी भी घायल हुई थी । इसे लेकर मोहल्ले में काफी आक्रोश था । घटना के बाद मोहल्ला के लोगों ने राजकुमार को तत्काल सदर अस्पताल पहुंचाया। राजकुमार चौधरी को होश नहीं था। इसके बाद भी डाक्टरों ने उन्हें बनारस रेफर कर दिया ।
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शहर का माहौल गर्म , लोगों में आक्रोश
शहर से बाहर निकलते ही राजकुमार चौधरी की मौत हो गई। उसके बाद शव अस्पताल पहुंचा। मोहल्ला के लोगों की भीड़ जुट गई और शहर का माहौल गर्म हो गया था । आक्रोशित लोग शव का पोस्टमार्टम होने से रोकने लगे थे। लगभग चार घंटे के प्रयास और एएसपी राजेश कुमार द्वारा परिजनों सहित मोहल्ले के लोगों को समझाने के बाद शव का पोस्ट मार्टम कराया गया ।
बेटे की दुश्मनी अपराधियों ने उसके पिता से निकाली
घटना के संबंध में 2019 में मीडिया को बताया गया कि गैंगवार में मारे गए कुख्यात अपराधी जयराम चौधरी के भाई नन्हक चौधरी की भी जेल में ही संदिग्ध मौत हुई थी। उसके बाद राजकुमार परिवार को संभाल रहे थे। लेकिन, बेटे की दुश्मनी अपराधियों ने उसके पिता से निकाली और मोहल्ला में चाय दुकान पर चाय पीने के दौरान उनको गोलियों से छलनी कर दिया ।
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हत्या के बाद केस दर्ज हुआ था, पुलिस के लिए बड़ा टास्क था
इस संबंध में वादी के लिखित आवेदन के आधार पर सासाराम नगर थाना काण्ड सं0-831 / 19, दिनांक 19.09.2019, धारा-147 / 148 / 342 / 302 / 120 (बी0) भा0द0वि0 एवं 27 आर्म्स एक्ट दर्ज किया गया था । श्री आशीष भारती, पुलिस अधीक्षक, रोहतास के द्वारा जिले में हत्या के लंबित काण्डो में फिरार चल रहे अपराधकर्मियों के त्वरित गिरफ्तारी हेतु तीनो अनुमण्डल अन्तर्गत अलग-अलग विशेष टीम का गठन किया गया है।
विशेष टीम के द्वारा इस कांड में शामिल अपराधकर्मियों के गिरफ्तारी हेतु उसके ठिकानों का पता लगाकर लगातार छापेमारी किया जा रहा था, लेकिन इस कांड में संलिप्त अपराधकर्मी पुलिस के भय से भागे फिर रहे थे। अंततः पुलिस के दबिश के कारण इस कांड में शामिल अपराधकर्मी रिजवान आलम उर्फ रिजवान थाना-सासाराम नगर, जिला- रोहतास माननीय न्यायालय में आत्मसमर्पण किया हैं।
Sasaram Rahul World Theatre Selection : सासाराम प्रखंड के समरडीहा गांव निवासी राहुल मिश्र ने यूएई में हुए एशिया थिएटर में अपनी शानदार प्रतिभा का परचम फहराकर बिहार का मान बढ़ाया है ।
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भारत से मात्र 25 कलाकार चयनित
एशिया थिएटर में हिंदुस्तान से मात्र 25 लोग ही चयनित हुए थें , राहुल को भी इस टीम में होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । खाड़ी देश आबूधाबी और दुबई में राहुल के अभिनय की खूब प्रशंसा हुई ।
हिंदुस्तान को सातवां स्थान
यूएई में हुए एशिया थिएटर में कुल 22 देशों के कलाकारों ने हिस्सा लिया था । सभी देशों के लिए 3 घंटो का समय निर्धारित था थिएटर के लिए ।
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हिंदुस्तान टॉप टेन में अपनी जगह बनाने में कामयाब हुआ । हिंदुस्तान को सातवां स्थान प्राप्त हुआ है । आपको बताते चलें की राहुल इंडियन टीम में बिहार से चयनित होनेवाले एक मात्र कलाकार थें ।
एक्टर शाहिद कपूर के पिता फाइनेंसर
बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर के पिता श्री पंकज कपूर ने भारत की ओर से परफॉर्मेंस करने गई टीम का फाइनेंशियल सपोर्ट किया था ।
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इंडियन आईडल का भी अनुभव
वर्ष 2018 में हिंदुस्तान का मशहूर रियलिटी शो इंडियन आईडल में बतौर सिंगर परफॉर्म कर चुके हैं । इन्होंने कला के क्षेत्र में सिंगिंग से ही शुरुआत किया था ।
मनोज तिवारी से लेकर अभिनेता राज बब्बर , शशि कपूर से जुड़ाव
भोजपुरी फिल्म अभिनेता मनोज तिवारी ने प्यार से राहुल को “भारत कुमार” का नाम दिया था । तब से राहुल को उनके प्रोफेशन के लोग भारत कुमार ही बुलाने लगे ।
बॉलीवुड अभिनेता शशि कपूर
2017-18 में दिल्ली के श्री राम थिएटर में अभिनय कला का शिक्षा लिया । उसी समय फिल्म अभिनेता राज बब्बर की पत्नी नाजीर राव बब्बर की थिएटर से जुड़ गए । बॉलीवुड अभिनेता शशि कपूर के थिएटर में राहुल चार पर अपनी परफॉर्मेंस से दिल जीत चुके हैं । राहुल को जीवन में एक बार “पृथ्वी थिएटर” में परफॉर्म करने की इक्षा है ।
वर्ल्ड थियेटर में राहुल चयनित हुए हैं
यूएई में हुए एशिया लेवल थिएटर में राहुल के शानदार प्रदर्शन के आधार पर इसी वर्ष 2022 के अप्रैल माह में होने जा रहे वर्ल्ड थियेटर में राहुल को चयनित किया गया है । “सासाराम कि गलियां” कि ओर से राहुल को ढ़ेर सारी शुभकामनाएं , आप इसी तरह शहर ,राज्य और देश का नाम बढ़ाते रहिए ।