बिहार राज्य के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में कैमूर पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा में स्थित माँ ताराचण्डी देवी का मंदिर (Tarachandi Dham) सासाराम नगर से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण में और सम्राट अशोक के शिलालेख से लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ चंडी देवी मंदिर के पास चट्टान पर सासाराम के प्राचीन राजा प्रताप धवल का एक शिलालेख भी है। रोहतास जिला प्रशासन के अनुसार, यह शिलालेख 12वीं शताब्दी के खरवार वंश के शासक प्रताप धवलदेव से संबंधित है। मंदिर परिसर में माँ तारा और सूर्य की प्राचीन प्रतिमाओं तथा अग्नि की खंडित प्रतिमा का भी उल्लेख मिलता है। यहाँ हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पूजा करने आते हैं। इसलिए यह एक सुंदर धार्मिक स्थल बन गया है। चारों तरफ पहाड़ों, झरनों और जलस्रोतों के बीच स्थित ताराचंडी मंदिर का मनोरम वातावरण मन मोह लेता है।

यह भारत के 51 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। अपनी मनोकामनाओं के पूरी होने की लालसा में दूर-दूर से यहाँ भक्त आते हैं। माँ ताराचण्डी के दर्शन के लिए नवरात्रि में श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। कथाओं, ग्रंथों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता के तारा स्वरूप की पूजा होती है। वैसे तो यहाँ सालभर भक्तों का आना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में यहाँ पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं की आस्था में माँ ताराचण्डी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मनोकामनाओं और विश्वास से जुड़ा पवित्र स्थल है।

नवरात्र में दूर-दराज से यहाँ भक्तों का आना होता है। कहा जाता है कि यहाँ आने वालों की हर मनोकामना माता रानी पूरी करती हैं। इसलिए लोग इन्हें मनोकामना सिद्धि देवी भी कहते हैं। सासाराम नगर से 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस मंदिर के प्रति यहाँ के लोगों में गहरी श्रद्धा और विश्वास है। नवरात्र में माँ दुर्गा के आठवें रूप की पूजा होती है। अष्टमी को माँ के दरबार में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। दूर-दराज से आए लोग माँ के दरबार में माथा टेकने के बाद माँ से आशीर्वाद के साथ-साथ सुख-समृद्धि की भी कामना करते हैं। माँ ताराचंडी विंध्य पर्वत की कैमूर पर्वत शृंखला में विराजमान हैं। भारत के 51 शक्तिपीठों की परंपरा में माँ ताराचंडी शक्तिपीठ का प्रमुख स्थान माना जाता है।
माँ ताराचण्डी धाम (Tarachandi Dham) और कथा



