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प्रकृति की महफ़िल सजी है, चले आइए धुआँ कुंड, सासाराम | Dhuan Kund

कुदरत की खूबसूरती तलाशने हम अक्सर दूर निकल जाते हैं, जबकि कुछ अनमोल नज़ारे अपनी ही मिट्टी में छिपे होते हैं। जहाँ पहाड़ों की खामोशी को झरनों की आवाज़ मिलती है, और पानी धुएँ की तरह उठकर प्रकृति का जादू बिखेरता है। **आइए, सासाराम के धुआँ कुंड से मिलिए—जहाँ नज़ारे आँखों में और यादें दिल में बस जाती हैं।**

आखिर प्रकृति से प्यार कौन नहीं करता? हर कोई अपनी छुट्टियों में पहाड़ों पर घूमने का ही प्लान बनाता है। ऐसी जगह, जहां प्रकृति की अनोखी छटा देखने को मिले और साथ ही वॉटरफॉल का आनंद लेने को मिल जाए, फिर क्या ही कहना! दूर-दराज से लोग हर साल प्रकृति का आनंद लेने देश-विदेश की अलग-अलग जगहों पर जाते हैं।

लेकिन क्या आप कभी धुआं कुंड वॉटरफॉल (Dhuan Kund Waterfall), सासाराम गए हैं? अगर नहीं, तो चलिए हम आपको इस जगह के बारे में कई ऐसी बातें बताते हैं, जिन्हें जानने के बाद आप यहां जाने का प्लान जरूर बनाना चाहेंगे। तो चलिए जानते हैं इस जगह के बारे में।

Dhuan Kund Waterfall सासाराम के कैमूर पहाड़ों के बीच प्राकृतिक दृश्य
धुआं कुंड की प्राकृतिक छटा आंखों को सुकून देती है।

धुआं कुंड की खासियत यह है कि इसके शीर्ष से आप प्रकृति की सुंदरता को बेहद करीब से देख सकते हैं और मंत्रमुग्ध हो सकते हैं। यहां हर साल काफी तादाद में लोग पहुंचते हैं और प्रकृति की इस अनोखी छटा को देखकर हैरान रह जाते हैं।धुआं कुंड वॉटरफॉल (Dhuan Kund Waterfall) से आपको विंध्य पर्वत शृंखला की कैमूर पहाड़ियों की खूबसूरती भी देखने को मिल सकती है।

मांझर कुंड के बिना धुआं कुंड अधूरा है

मांझर कुंड जलप्रपात सासाराम – Manjhar Kund Waterfall
मांझर कुंड

सासाराम स्थित कैमूर पहाड़ी का पानी चट्टानों के बीच एक धारा बनाकर टेढ़े-मेढ़े रास्तों से गुजरते हुए मांझर कुंड जलप्रपात में इकट्ठा होता है।

मांझर कुंड से धुआं कुंड जाने वाली पुरानी पुलिया, सासाराम
मांझर कुंड से धुआं कुंड जाने वाली पुरानी पुलिया

यह पानी लगभग आधा किलोमीटर आगे जाकर ऊँचे पर्वत से झरने के रूप में जमीन पर गिरता है। यही धुआं कुंड (Dhuan Kund) कहलाता है।

लगभग 120 फीट की ऊँचाई से गिरकर पानी धुएँ जैसा दिखता है | Dhuan Kund

मांझर कुंड से Dhuan Kund की ओर बहती जलधारा
मांझर कुंड से धुआं कुंड की तरफ बहता हुआ पानी

सासाराम की कैमूर पहाड़ी से लगभग 36.5 मीटर (करीब 120 फीट) की ऊँचाई से गहरी घाटी में गिरने वाले पानी से उठने वाली धुंध या धुएँ जैसी फुहारों के कारण इस स्थान को धुआं कुंड नाम मिला है। यह ऊँचाई बिहार पर्यटन विभाग की आधिकारिक विवरणिका में दर्ज है।

Dhuan Kund Waterfall Sasaram – घाटी में गिरता झरना
Dhuan Kund Sasaram

आपको बताते चलें कि धुआं कुंड में चारों तरफ पहाड़ियों के बीच से सूर्य की किरणें जब गिरते हुए जलप्रपात पर पड़ती हैं, तो पानी की फुहारों में सतरंगी छटा बिखर जाती है। यह देखने में इंद्रधनुष जैसी नजर आती है। यह प्राकृतिक छटा आंखों को सुकून पहुंचाती है।

दो नदियों की जन्मस्थली है धुआं कुंड / Dhuan Kund

धुआं कुंड सासाराम का प्राकृतिक दृश्य और कैमूर पहाड़ियां
Dhuan Kund Sasaram

स्थानीय विवरणों के अनुसार, धुआं कुंड की जलधारा का संबंध बिहार की काव और कुदरा नदियों से है। कैमूर पहाड़ियों के इस जलप्रवाह से जुड़ी ये नदियां आगे बिहार के विभिन्न इलाकों से गुजरती हैं। काव नदी की पूरी कहानी यहां पढ़िए।

ऋषि-मुनियों की तपोस्थली है धुआं कुंड

धुआं कुंड के पास प्राचीन शिव मंदिर, सासाराम
धुआं कुंड में स्थित प्राचीन शिव मंदिर

धुआं कुंड में भगवान शिव और मां शक्ति की आराधना होती है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में इस इलाके में कई ऋषि-मुनि रहा करते थे। यहां साधु-संतों से जुड़ी कई पुरानी संरचनाएं और गुफाएं हैं।

मां शक्ति की आराधना और आकर्षक व्यू सेंटर

Dhuan Kund Sasaram के पास मां दुर्गा मंदिर और व्यू पॉइंट
धुआं कुंड, सासाराम में मां दुर्गा का मंदिर

धुआं कुंड में मां दुर्गा का एक छोटा-सा, लेकिन महत्वपूर्ण मंदिर है। कई लोगों की आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है।लोग कहते हैं कि सच्ची श्रद्धा से मांगी गई हर मनोकामना इस मंदिर में पूर्ण होती है। स्थानीय जानकारी के अनुसार, इस मंदिर को सासाराम के टकसाल संगत मोहल्ले में रहने वाले माता रानी के अनन्य भक्तों ने बनवाया था।

आपको बताते चलें कि धुआं कुंड की सुंदरता से मंत्रमुग्ध होने के लिए यह मंदिर सबसे उत्तम स्थानों में से एक है। यहां से धुआं कुंड झरने का बेहतरीन व्यू मिलता है। फोटो प्रेमियों के लिए इस मंदिर का परिसर सबसे पसंदीदा स्पॉट है।

बरसात में सैलानियों का पसंदीदा स्पॉट

बरसात के मौसम में, खासकर सावन और रक्षाबंधन के ठीक बाद पड़ने वाले रविवार तक धुआं कुंड सैलानियों से पटा रहता है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग पिकनिक मनाने यहां आते हैं। बिहार पर्यटन विभाग के अनुसार, रक्षाबंधन के बाद पहले रविवार को यहां मेले की भी परंपरा है। बिहार पर्यटन की वेबसाइट पर भी इन दोनों जलप्रपातों का उल्लेख है।

धुआं कुंड की पहाड़ियों में स्थित प्राचीन गुफा

कई लोग धुआं कुंड के पास दोनों तरफ की पहाड़ियों पर खाना पकाकर खाते हैं, तो कुछ लोग तैयार खाना भी साथ लेकर आते हैं। इस दौरान पिकनिक मनाने वाले कुछ सैलानी पहाड़ी पर बहने वाली छोटी-छोटी जलधाराओं का पानी भी पीते हैं, जिसे स्थानीय लोग जड़ी-बूटियों से युक्त और सुपाच्य मानते हैं। हालांकि, बिना जांच या शुद्ध किए प्राकृतिक जलस्रोत का पानी पीने से बचना चाहिए।

ऐसे पहुँचें धुआं कुंड (Dhuan Kund)

मां ताराचण्डी धाम से मांझर कुंड और धुआं कुंड पहुंचने का रास्ता
माँ ताराचण्डी धाम से मांझर कुंड और धुआं कुंड जाने का रास्ता

बिहार की राजधानी पटना से करीब 159 किलोमीटर और जिला मुख्यालय सासाराम से लगभग 10 से 15 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धुआं कुंड फॉल तक जाने के लिए मां ताराचण्डी धाम के पास से सड़क बनी हुई है। बिहार पर्यटन विभाग लगभग 10 किलोमीटर और रोहतास जिला प्रशासन लगभग 15 किलोमीटर दूरी बताता है; वास्तविक दूरी आपके चुने हुए रास्ते पर निर्भर करेगी।

सासाराम की कैमूर पहाड़ी पर मांझर कुंड जाने वाला रास्ता
सासाराम पहाड़ी के ऊपर से मांझर कुंड जाने का रास्ता

दो-पहिया और चार-पहिया वाहन से यहां सुबह जाकर शाम तक लौटा जा सकता है। आपको बताते चलें कि इन रास्तों में लाइट और पंचर आदि की व्यवस्था सीमित हो सकती है। बीच में आबादी भी कम है, इसलिए अंधेरा होने से पहले लौटना जरूरी है।

इन बातों का रखें ध्यान

“सासाराम की गलियाँ” संगठन आपसे अनुरोध करता है कि किसी भी जलप्रपात पर भ्रमण करने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें:

  • धुआं कुंड के बेस्ट व्यू सेंटर, यानी दुर्गा माता के मंदिर के पास रास्ता संकीर्ण है, इसलिए वहां भीड़ न लगाएं।
  • इस मंदिर की बाउंड्री बहुत छोटी और कमजोर है, इसलिए उससे लटकने, झूलने या उसके ऊपर चढ़ने की कोशिश गलती से भी न करें। यह जानलेवा साबित हो सकता है।
काव नदी और धुआं कुंड से जुड़ा प्राकृतिक दृश्य, सासाराम
Kav River Sasaram Rohtas
  • धुआं कुंड में नीचे उतरने की गलती हरगिज न करें।
  • धुआं कुंड में नहाने या गहराई नापने की कोशिश न करें।
  • सेल्फी लेने के लिए जलप्रपात की खतरनाक जगहों पर बिल्कुल न जाएं।
Dhuan Kund Waterfall के पास पर्यटकों के लिए यात्री शेड
धुआं कुंड के पास पर्यटकों के लिए बनाया गया यात्री शेड
  • बारिश के कारण फिसलन का डर रहता है, इसलिए विशेष सावधानी रखें।
  • तेज उफान वाली जगहों के अत्यधिक करीब जाने का प्रयास बिल्कुल न करें। इन जगहों पर खतरे की आशंका हमेशा बनी रहती है।
ताराचण्डी धाम से Dhuan Kund जाने वाले रास्ते पर वन विभाग की चौकी
माँ ताराचंडी धाम से मांझर कुंड और धुआं कुंड के रास्ते में वन विभाग का चेक पोस्ट
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