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काले बादल, रिमझिम बारिश, कल-कल बहते झरने और तृप्ति देने वाली ठंडी हवाएँ बुला रही हैं गीता घाट आश्रम, सासाराम | Gita Ghat Ashram

सावन की फुहारें, पहाड़ों की बहारें और झरनों की पुकार... गीता घाट में आपका इंतजार है।

इस मानसून में आप घर में बैठकर बारिश का आनंद ले रहे होंगे। काले बादल, रिमझिम बारिश और गर्मी से राहत देती ठंडी हवाएँ—ऐसा मौसम तो एक ही जगह दिखाई देता है, वो है बिहार का सासाराम। प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर इस शहर में, सासाराम अनुमंडल तथा जिले के आसपास के इलाकों में कई खूबसूरत फॉल्स मौजूद हैं, जहाँ आप जन्नत का मज़ा ले सकते हैं।

दिल को सुकून पहुँचाने वाले फॉल्स ढूंढ रहे हैं तो मानसून के इस खूबसूरत मौसम में आपको सासाराम के गीता घाट फॉल और आश्रम घूम ही आना चाहिए।

Gita Ghat Ashram Sasaram की पहाड़ियों और हरियाली का मनोरम दृश्य
यह कश्मीर नहीं, “गीता घाट आश्रम, सासाराम” है

सासाराम शहर से मात्र 10 किलोमीटर की दूरी पर गीता घाट आश्रम (Gita Ghat Ashram) मौजूद है। यहाँ पर एक सुंदर झरना भी मौजूद है, जिसकी बात हम लोग कर रहे हैं। ये जगह पिकनिक मनाने के लिए शानदार है।

ये वॉटरफॉल इतना खूबसूरत है कि पहली नज़र में आपका मन मोह लेगा। ऊँचाई से गिरता हुआ पानी जब नीचे पत्थरों पर पड़ता है तो वो नजारा बेहद खूबसूरत होता है। बिहार के ज्यादातर लोग इस खूबसूरत वॉटरफॉल के बारे में जानते हैं लेकिन ऐसे भी लोग हैं जिन्हें इसके राजसी सौंदर्य का बिल्कुल अंदाजा नहीं है।

सावन आया, बादल छाए… बोलो तुम कब आओगे

गीता घाट आश्रम सासाराम की पहाड़ी पर जाने का रास्ता
पहाड़ी पर गीता घाट आश्रम जाने का रास्ता

आपको यहाँ बारिश के मौसम में आना चाहिए। इस समय ये वॉटरफॉल पानी से लबालब भरा रहता है। लेकिन बारिश के समय वॉटरफॉल के नीचे की चट्टानें बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं इसलिए सावधानी जरूर रखें।

गीता घाट आश्रम सासाराम का प्राकृतिक दृश्य
गीता घाट आश्रम, सासाराम

परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक मनाना चाहते हैं तो आपको इस जगह पर आना चाहिए। गीता घाट वॉटरफॉल घूमने का सबसे सही समय जुलाई से अगस्त तक है।

विश्वविख्यात गीता घाट बाबा

परमहंस स्वामी शिवानंद जी तीर्थ अर्थात गीता घाट बाबा का चित्र
परमहंस स्वामी शिवानंद जी तीर्थ “गीता घाट बाबा”

सासाराम की संत परंपरा के प्रतीक रहे परमहंस स्वामी शिवानंद जी तीर्थ, जिन्हें “गीता घाट बाबा” कहा जाता है, सन् 1950 के दशक के उत्तरार्ध में कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में आए थे। कई वर्षों तक यहाँ साधना में लीन रहने के क्रम में उनकी ख्याति देश-विदेश तक फैली थी।

गीता घाट बाबा का बाघ से सामना

गीता घाट आश्रम की पहाड़ी कुटिया में गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी से मुलाकात
पहाड़ के ऊपर कुटिया में मौजूद गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी, “सासाराम की गलियां” से खास मुलाकात

इन्होंने आज के गीता घाट आश्रम के परी माई (गदहिया कुंड) में आकर तप प्रारंभ कर दिया। लगातार 22 दिनों तक तप-साधना की। इस दौरान बाघ से भी इनका सामना हुआ। इस स्थान पर बाघ पानी पीने आते थे। बाबा को तप में लीन देखकर भय से बाघ ने पानी पीना छोड़ दिया।

गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी की पहाड़ी कुटिया
पहाड़ के ऊपर गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी की कुटिया

बाबा ने बाघ को सहलाया। इसके बाद बाघों को भयमुक्त होकर पानी पीने देने के लिए वह उस स्थान को छोड़कर शीतल कुंड झरने पर चले गए। ये भी आज के गीता घाट आश्रम में ही है।

सासाराम के साहू टाकीज मुक्ताश्रम में ब्रह्मलीन हुए

गीता घाट आश्रम में प्रकृति के बीच रहते गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी
आज भी भौतिकता, मोह-माया, टेक्नोलॉजी और बाहरी दुनिया की चमक-दमक से दूर गीता घाट बाबा के उत्तराधिकारी पहाड़ पर प्रकृति की गोद में रहते हैं

सादगी और त्याग के प्रतीक बाबा के शिष्यों में प्रत्येक वर्ग के किसान, व्यवसायी, अधिवक्ता, डॉक्टर, इंजीनियर से लेकर प्रोफेसर तक हैं। बाबा का देहावसान वर्ष 1996 में सासाराम शहर के साहू टाकीज मुक्ताश्रम में हुआ था।

गुरु पूर्णिमा पर गीता घाट में मेला लगता है

गीता घाट पहाड़ी के नीचे भजन-कीर्तन करते गीता घाट बाबा के शिष्य
गीता घाट पहाड़ी के नीचे गीता घाट बाबा के अन्य शिष्य भजन-कीर्तन करते हुए

गुरु पूर्णिमा के अवसर पर गीता घाट आश्रम (Gita Ghat Ashram) में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगता है। दूर-दराज से भक्त आते हैं और पूजा-अर्चना के बाद मेले का आनंद लेते हैं।

नदी के रास्ते गीता घाट झरने का सफ़र यादगार होता है

गीता घाट झरने तक नदी के किनारे जाने का रास्ता
नदी से गीता घाट झरने तक जाने का रास्ता

गीता घाट आश्रम से झरने तक का सफ़र बहुत ही रोमांचक होता है। इस दौरान आपको नदी की गहराई, चट्टानों की ऊँचाई और काई का ध्यान भी रखना पड़ता है। कई जगहों पर नदी का किनारा आपको “तिनके का सहारा” की तरह प्रतीत होगा।

गीता घाट वॉटरफॉल की ओर नदी के रास्ते जाते युवा सैलानी
नदी के रास्ते गीता घाट वॉटरफॉल जाते युवा सैलानी

जबकि कई जगहों पर नदी में उतरे बिना झरने तक पहुँचने का कोई दूसरा विकल्प मौजूद नहीं रहेगा। ऐसे में नदी के रास्ते गीता घाट झरने तक जाने में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

ऐसे पहुँचें गीता घाट आश्रम सासाराम (Gita Ghat Ashram)

धरबैर गांव सासाराम में गीता घाट आश्रम का प्रवेश द्वार
गीता घाट आश्रम प्रवेश द्वार, धरबैर गांव, दरिगांव थाना, सासाराम अनुमंडल

सासाराम शहर से कादिरगंज-दरिगांव सड़क के माध्यम से लगभग 10 किलोमीटर का सफ़र करके धरबैर गांव पहुँचिए। धरबैर गांव में एक विशाल मुख्य प्रवेश द्वार बना हुआ है। इस द्वार के जरिए आप गांव के बीचोंबीच से गुजरते हुए गीता घाट आश्रम पहुँच जाएँगे।

गीता घाट आश्रम सासाराम तक जाने का सुंदर पहाड़ी रास्ता
गीता घाट आश्रम का रास्ता हिल स्टेशन का आनंद देता है

यहाँ पर गीता घाट बाबा के शिष्यों के कई साधना आश्रम बने हुए हैं। यहीं पर गीता घाट फॉल भी देखने को मिल जाएगा।

पॉइंट्स टू बी नोटेड, माई लॉर्ड

“सासाराम की गलियां” संगठन आपसे अनुरोध करता है कि किसी भी जलप्रपात पर भ्रमण करने से पहले इन बातों का जरूर ध्यान रखें:

Gita Ghat Ashram सासाराम का प्राकृतिक नज़ारा
Gita Ghat Ashram
  • गीता घाट पर्यटन स्थल के साथ एक आध्यात्मिक स्थल भी है, इसलिए इसकी शुद्धता का पूर्ण ख्याल रखें, परंपरा का सम्मान करें।
  • यहाँ पर मांस-मछली, शराब इत्यादि जैसी चीजों का बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें, क्योंकि ये सनातन संस्कृति में वर्जित हैं।
गीता घाट की पहाड़ियों और प्राकृतिक नज़ारे की सुंदरता
गीता घाट का नज़ारा आंखों को सुकून देता है
  • सेल्फी लेने के लिए जलप्रपात की खतरनाक जगहों पर बिल्कुल नहीं जाएँ।
  • बारिश के कारण फिसलन का डर है, इसलिए पहाड़ पर चढ़ने और उतरने के दौरान विशेष सावधानी रखें।
गीता घाट आश्रम के आसपास कैमूर पहाड़ियों का प्राकृतिक दृश्य
गीता घाट आश्रम धरती पर स्वर्ग का अनुभव कराता है
  • सेल्फी लेने के लिए पहाड़ के एकदम किनारे पर नहीं जाएँ, फिसलकर गिरने का डर है।
  • घाट पहाड़ की घाटी वर्टिकल है, इसलिए किनारे जाते समय सावधानी रखें।
  • जलप्रपात में तेज उफान वाली जगहों के अत्यधिक करीब जाने का प्रयास बिल्कुल न करें, इन जगहों पर खतरे की आशंका हमेशा बनी रहती है।
गीता घाट में पिकनिक के बाद फेंका गया प्लास्टिक और कूड़ा
लापरवाह लोगों द्वारा पिकनिक मनाकर गीता घाट में फेंका गया कूड़ा
  • कृपया पिकनिक मनाकर इधर-उधर प्लास्टिक, पत्तल, ग्लास, खाना और कूड़ा फेंक कर पर्यटक स्थल व प्रकृति को गंदा न करें। इससे नदी में प्रदूषण होता है और जंगली जानवरों के इसे खाने का भी खतरा रहता है।
गीता घाट आश्रम की पहाड़ी से दिखाई देती प्राकृतिक सुंदरता
गीता घाट आश्रम शीर्ष से आप प्रकृति की खूबसूरती को बेहद करीब से देख सकते हैं और इसका आनंद ले सकते हैं

यह भी पढ़ें: धुआं कुंड वॉटरफॉल, सासाराम और मांझर कुंड जलप्रपात।

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