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सासाराम के इस्लाम शाह सूरी: ग्वालियर से चलाई उत्तर भारत की सल्तनत, जानिए इतिहास और अधूरे मकबरे की कहानी – Islam Shah Suri

एक बादशाह, आठ साल की हुकूमत और सदियों से अधूरा पड़ा एक मकबरा

शेरशाह सूरी उत्तर भारत के एक बड़े भूभाग के शासक थे। उनका कार्यकाल भी आम जनों के लिए सुखद था। अपने पाँच वर्षों के शासनकाल में शेरशाह ने अनेक जनकल्याणकारी कार्य किए थे। उनके बाद उनके पुत्र इस्लाम शाह सूरी ने शासन संभाला।

शेरशाह की मृत्यु

1545 में राजपूतों के कालिंजर साम्राज्य और किले को हासिल करने के लिए युद्ध के क्रम में चंदेल राजपूतों से लड़ते हुए तोप का गोला वापस लगने के कारण शेरशाह की मृत्यु हो गई थी।

शेरों के शेर शेरशाह सूरी का मकबरा घूमने से पहले यह जान लीजिए : Click To Read

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सलीम शाह सूरी की ताजपोशी

शेरशाह सूरी की मृत्यु के बाद उनका पुत्र इस्लाम शाह सूरी (Islam Shah Suri) उत्तर भारत की गद्दी का उत्तराधिकारी बना। इस्लाम शाह का वास्तविक नाम जलाल खान था। उसका एक और नाम सलीम शाह सूरी (Salim Shah Suri) था। वह शेरशाह सूरी का पुत्र था। उसने आठ वर्ष (1545–1553) उत्तर भारत पर शासन किया।

इस्लाम शाह सूरी (Islam Shah Suri) और सूरी वंश के इतिहास से संबंधित चित्र

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ग्वालियर किला शेरशाह ने जीता था, इस्लाम शाह के लिए वरदान बना

मध्य प्रदेश का ऐतिहासिक ग्वालियर किला, शेरशाह सूरी और इस्लाम शाह सूरी से जुड़ा इतिहास
Gwalior Fort, Madhya Pradesh | Pic Credit: Culture Trip

सन् 727 ई. में सूर्यसेन नामक एक सरदार ने ग्वालियर किला बनवाया था। इस पर कई राजपूत राजाओं ने राज किया। 989 वर्षों तक पाल वंश ने राज किया, फिर प्रतिहारों ने भी राज किया। मोहम्मद गजनी ने हमला किया, लेकिन हार का सामना करना पड़ा।

बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक, इल्तुतमिश, महाराजा देवरम, मान सिंह और बाबर ने राज किया। शेरशाह सूरी ने बाबर के बेटे हुमायूँ को हराकर इस किले को अपने कब्जे में ले लिया था।

इस्लाम शाह ने दिल्ली की जगह ग्वालियर को बनाया राजधानी

ग्वालियर किला, मध्य प्रदेश – इस्लाम शाह सूरी की राजधानी के संदर्भ में
Gwalior Fort | Pic Credit: Culture Trip

पूर्व का जिब्राल्टर कहे जाने वाले अजेय ग्वालियर दुर्ग को देश की राजधानी होने का गौरव भी मिल चुका है। अफगानिस्तान से आए हसन शाह सूरी के पोते और शेरशाह सूरी के बेटे इस्लाम शाह सूरी (Islam Shah Suri) ने लगातार हमलों से सल्तनत को सुरक्षित रखने के मकसद से इस अजेय दुर्ग को अपनी राजधानी बनाया था।

हेमू को दिल्ली का प्रधानमंत्री बना दिया था। खुद ग्वालियर में बैठकर सामरिक योजनाओं का संचालन करने लगा था। हालांकि, अपनी अजेय बनावट और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों की वजह से ग्वालियर दुर्ग सातवीं शताब्दी से ही महत्वपूर्ण रहा है। हर बाहरी आक्रमणकारी की महत्वाकांक्षा ग्वालियर दुर्ग पर शासन करने की रहती थी।

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इसकी वजह यह थी कि यह दुर्ग भारत के दक्षिण की ओर के युद्ध अभियानों के लिए सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। इसीलिए हुमायूँ से जहाँगीर तक मुगल शासकों ने इस दुर्ग को खास दर्जा दिया था। जहाँगीर और हुमायूँ ने तो ग्वालियर किले में कई बार दरबार भी लगाया था।

इस्लाम शाह सूरी का कार्यकाल | Islam Shah Suri Regime

राजनीतिक स्थिति

  • इस्लाम शाह सूरी को इतिहासकार शेरशाह सूरी से अलग मानते हैं। शेरशाह सूरी को लिबरल, फ्लेक्सिबल और भरोसेमंद माना जाता है, जबकि इस्लाम शाह इसके उलट क्रूर, कट्टर सांप्रदायिक और अड़ियल था।
  • शेरशाह ने मात्र पाँच साल में बहुत सारे विकास के कार्य किए, जबकि इस्लाम शाह आठ वर्षों में भी कुछ ऐसे जनकल्याणकारी कार्य नहीं कर सका, जिन्हें याद किया जा सके।
  • इस्लाम शाह सूरी दुश्मनों के प्रति कठोर तथा क्रूर था।
  • अगर इस्लाम शाह जीवित रहता (मृत्यु के बारे में आगे पढ़ेंगे), तो हुमायूँ कभी भी उत्तर भारत पर हमले की हिम्मत नहीं करता और मुगल साम्राज्य की दोबारा वापसी नहीं होती।

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सामाजिक स्थिति

  • शेरशाह सूरी का बनाया हुआ सामाजिक ताना-बाना इस्लाम शाह सूरी के समय थोड़ा कमजोर हो गया, फिर भी अधिकांश मुगलों या अंग्रेजों से ठीक था।
  • शेरशाह ने हिंदुओं (बौद्ध + सिख + जैन + हिंदू तब एक ही माने जाते थे, आजादी के बाद अलग धर्म का दर्जा मिला, लेकिन शादी के कानून अभी भी एक ही हैं, “हिंदू मैरिज एक्ट”) से लिया जाने वाला जजिया टैक्स नहीं हटाया था। इस्लाम शाह ने भी इसे जारी रखा। हालांकि, कहा जाता है कि शेरशाह कुछ दिन और राजा रहता तो जजिया को हटा लेता।

क्या जजिया और जकात एक ही हैं?

  • नहीं, जकात इस्लाम में दान-दक्षिणा की तरह अच्छी चीज है, जो स्वेच्छा से दी जाती है। यह धार्मिक रिवाज है और इसका धार्मिक महत्व भी है। इसे समाज की भलाई में लगाया जाता है, जैसे हिंदुओं में दान-दक्षिणा का महत्व है।
  • जबकि जजिया हिंदुओं से धार्मिक आधार पर लिया जाने वाला जबरदस्ती का टैक्स था। यह स्वैच्छिक नहीं था और इसे सरकार लेती थी।
  • अकबर ने इसे कुछ वर्षों के लिए खत्म कर दिया था, लेकिन बाद में पुनः लागू हो गया।
  • शेरशाह सूरी ने देश के विकास के लिए बहुत कुछ किया, इस्लाम शाह इसमें पीछे रह गया।
  • इस्लाम शाह भले ही शेरशाह जैसा नहीं था, लेकिन बाबर, औरंगजेब जैसे मुगल आक्रांताओं या अंग्रेजों से ठीक था। उसने धार्मिक स्थल नहीं तोड़े और बहुत हद तक शेरशाह के सूरी साम्राज्य को सुरक्षित भी रखा। धार्मिक तौर पर कट्टर रहते हुए भी बहुत हद तक मिल-जुलकर चलने की कोशिश की (उसने हेमू को प्रधानमंत्री बनाया)। हो सकता था कि धीरे-धीरे अनुभव बढ़ता तो व्यवहार में अंतर आता।

आर्थिक स्थिति

इस्लाम शाह सूरी के शासनकाल का ऐतिहासिक सिक्का – Islam Shah Suri Coin
Islam Shah Suri Coin | Credit: Wikipedia
  • इस्लाम शाह सूरी के समय अर्थव्यवस्था सामान्य थी।
  • शेरशाह के कार्यकाल की तरह अर्थव्यवस्था का तेज रफ्तार विकास इस्लाम शाह सूरी के समय नहीं था। जैसा शेरशाह छोड़कर गया था, वैसा ही था।
  • इस्लाम शाह सूरी ने अर्थव्यवस्था के मामले में कोई खास उपलब्धि हासिल नहीं की, जैसी उसके पिता शेरशाह सूरी ने की थी।

इस्लाम शाह सूरी की मृत्यु

ग्वालियर के इतिहास लेखक हरिहर निवास द्विवेदी के मुताबिक, किसी खतरनाक बीमारी से इस्लाम शाह की मौत के बाद उसका पुत्र फिरोज शाह शासक बना, लेकिन असल बागडोर हेमू के हाथ में आ गई।

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इस्लाम शाह सूरी के बेटे फिरोज शाह सूरी का कत्ल

सलीम शाह सूरी (Islam Shah Suri) की मृत्यु के बाद फिरोज शाह सूरी के गद्दी पर बैठने के कुछ ही दिनों बाद शेरशाह सूरी के भतीजे मुहम्मद मुबरीज़ द्वारा फिरोज शाह सूरी (शेरशाह सूरी का पोता) को मौत के घाट उतार दिया गया और मुबरीज़ ने मुहम्मद शाह आदिल के नाम से शासन किया।

इस्लाम शाह सूरी का मकबरा

सासाराम के तकिया मोहल्ले में इस्लाम शाह सूरी का अधूरा मकबरा
इस्लाम शाह सूरी का मकबरा, सासाराम | PC: Syed Altamash

बिहार के सासाराम में तकिया मोहल्ले में इस्लाम शाह का अर्धनिर्मित मकबरा मौजूद है। यह मकबरा इस्लाम शाह सूरी अपने लिए बनवा रहा था, लेकिन उसके जीवनकाल में पूर्ण नहीं हो सका।

तकिया, सासाराम में इस्लाम शाह सूरी के अधूरे मकबरे का दृश्य
इस्लाम शाह सूरी का मकबरा, तकिया, सासाराम | PC: Syed Altamash

इस्लाम शाह सूरी के बेटे फिरोज शाह सूरी का भी कार्यकाल बहुत कम समय के लिए रहा और उसकी उम्र भी कम थी।

सासाराम बिहार में इस्लाम शाह सूरी का अधूरा रौजा और ऐतिहासिक मकबरा
Islam Shah Suri Rauza, Sasaram, Bihar | PC: Syed Altamash

इसलिए वह भी इस मकबरे का निर्माण पूर्ण कराने में सफल नहीं रहा। इस तरह यह मकबरा अर्धनिर्मित स्थिति में ही रह गया।

इस्लाम शाह सूरी की कब्र

सासाराम में इस्लाम शाह सूरी के मकबरे के परिसर की कब्रें
Graveyard in Islam Shah Tomb: इस्लाम शाह सूरी के मकबरे में खुले में दफनाया गया शव बादशाह इस्लाम शाह सूरी का नहीं है। यह स्थानीय या अन्य लोगों का है।

इस्लाम शाह के मकबरे, तकिया, सासाराम में खुले में दफनाया गया शव बादशाह इस्लाम शाह का नहीं है। यह स्थानीय या अन्य लोगों का है।

इस्लाम शाह सूरी का ऐतिहासिक अधूरा मकबरा, तकिया, सासाराम
Islam Shah Suri Tomb, Sasaram, India | PC: Syed Altamash

इस्लाम शाह सूरी अपने जीवनकाल में निर्माणाधीन मकबरे को पूर्ण नहीं करा सका था।

शेरशाह सूरी के सासाराम स्थित मकबरे के अंदर परिवार की कब्रें
Sher Shah Suri Tomb, Sasaram, Bihar: Graves of His Family Present Inside | PC: Arjun Mehta – Pixjun

इसलिए इस्लाम शाह (Islam Shah Suri) को शेरशाह सूरी के मकबरे में ही दफन किया गया है। इस मकबरे में शेरशाह का लगभग पूरा परिवार मौजूद है।

अपील

सूरी वंश के दूसरे बादशाह और सासाराम के लाल इस्लाम शाह सूरी के सम्मान में यह पोस्ट अधिक से अधिक शेयर करें, ताकि हमारी युवा पीढ़ी अपने पूर्वजों और इतिहास को जान सके और सरकार इस्लाम शाह सूरी के मकबरे को नष्ट होने से बचाए तथा संरक्षित करे और पर्यटन को बढ़ावा दे।

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