HomeSasaram3. Samay Yatra2300 वर्ष पुराना सासाराम का अशोक शिलालेख चूना-पुताई, मजार और ताले को...

2300 वर्ष पुराना सासाराम का अशोक शिलालेख चूना-पुताई, मजार और ताले को लेकर विवादों में रहा। पढ़िए 2022 की रिपोर्ट में एएसआई के पत्राचार, इतिहास और नेताओं के बयान | Ashoka encryption sasaram converted in mazar

“आस्था का सम्मान भी जरूरी है, इतिहास का संरक्षण भी। सवाल किसी धर्म या समुदाय का नहीं, हमारी साझा विरासत का है। संविधान भी हमें अपनी सांस्कृतिक धरोहर सहेजने की जिम्मेदारी याद दिलाता है। क्योंकि इतिहास सिर्फ हमारा अतीत नहीं, आने वाली पीढ़ियों की अमानत भी है।”

सासाराम का अशोक शिलालेख अक्टूबर 2022 में चूना-पुताई, चादर चढ़ाने और ताले को लेकर विवादों में रहा। अफगानिस्तान के बामियान में बुद्ध की विशाल प्रतिमाओं को तालिबान ने विस्फोट से नष्ट कर दिया था। आपने इस घटना के बारे में देखा या सुना जरूर होगा। इसी तरह इस्लामिक स्टेट ने भी इराक के कई पुरातात्विक स्थलों को नुकसान पहुँचाया था।

भारत में वैसे हालात नहीं हैं, लेकिन सासाराम की चंदन पहाड़ी पर स्थित सम्राट अशोक के प्राचीन शिलालेख को लेकर भी विवाद सामने आया था। आरोप है कि गुफा में मौजूद इस शिलालेख पर चूना पोतकर चादर चढ़ाई गई और इसे मजार का रूप दे दिया गया। इससे शिलालेख की लिखावट को नुकसान पहुँचने की आशंका जताई गई थी। बिहार में स्थित अशोक का यह लघु शिलालेख एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक धरोहर है।

सासाराम का अशोक शिलालेख: चूना-पुताई, चादर चढ़ाने से लेकर कजरी बाबा तक का सफर

सासाराम का अशोक शिलालेख चादर चढ़ाए जाने से पहले
सासाराम का अशोक शिलालेख चादर चढ़ाए जाने से पहले

जिस भारत से बौद्ध धर्म का प्रसार पूरी दुनिया में हुआ, उसी देश में सम्राट अशोक की इस ऐतिहासिक धरोहर की स्थिति चिंता का विषय बनी हुई है। इतिहासकारों और पुरातत्व में रुचि रखने वाले लोगों के सामने इसके संरक्षण का सवाल है। अफगानिस्तान के बामियान में तो तालिबान ने पहाड़ों पर बनी बुद्ध की विशाल मूर्तियों को विस्फोट से नष्ट कर दिया था। सासाराम का मामला उससे अलग है, लेकिन यहाँ भी एक प्राचीन शिलालेख को आस्था से जुड़े विवाद के कारण लोगों की नजरों से ओझल किए जाने की चिंता जताई जा रही है।

सम्राट अशोक का ऐतिहासिक लघु शिलालेख सासाराम
सम्राट अशोक का ऐतिहासिक लघु शिलालेख, सासाराम

अगर सचमुच यहाँ किसी पीर की मजार होने की मान्यता है, तो भी कोई महात्मा यह नहीं चाहेगा कि किसी ऐतिहासिक धरोहर को नुकसान पहुँचे। इस शिलालेख की पहली पंक्ति ‘एलेन च अंतलेन जंबुदीपसि’ बताई जाती है। इसके संदेश को सहिष्णुता और सद्भाव की भावना से जोड़कर देखा जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि इस प्राचीन पत्थर पर दर्ज इतिहास को लोगों की नजरों से ओझल क्यों होने दिया जाए?

  • WhatsApp Image 2021 04 16 at 8.07.07 PM
    Advertisement**
  • Royal Crockery Sasaram
    Advertisement**
  • WhatsApp Image 2021 04 12 at 11.39.29 PM
    Advertisement**
  • WhatsApp Image 2021 03 06 at 10.10.52 PM
    Advertisement**
  • Advertisement**
    Advertisement**
  • swadeshi Restaurant add
    Advertisement**
  • daksha
    **Advertisement
  • banner

क्या है सम्राट अशोक के लघु शिलालेखों में?

सम्राट अशोक के लघु शिलालेख भारतीय इतिहास की महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इनमें ब्राह्मी लिपि में संदेश दर्ज हैं। देश के ऐसे शिलालेखों में सासाराम का अशोक शिलालेख भी शामिल है। बिहार में स्थित इस शिलालेख का विशेष ऐतिहासिक महत्व है।

इस शिलालेख को पढ़ा जा चुका है और कई भाषाओं में इसका अनुवाद भी उपलब्ध है। इसके इतिहास, महत्व और यहाँ तक पहुँचने की जानकारी के लिए हमारी यह खबर पढ़ सकते हैं: देश घूमने से पहले सासाराम में बिहार का इकलौता अशोक शिलालेख घूम लीजिए।

अंग्रेजों ने ही महत्व समझकर सन् 1917 में संरक्षित धरोहर घोषित कर दिया था

सासाराम अशोक शिलालेख संरक्षण से संबंधित सरकारी पत्राचार दस्तावेज
अशोक शिलालेख के संरक्षण से संबंधित सरकारी पत्राचार दस्तावेज

भारत की कई ऐतिहासिक धरोहरों की स्थिति आजादी के बाद बेहतर हुई है। सासाराम के शेरशाह मकबरे की बात करें तो इसकी स्थिति में भी 1990 के बाद बदलाव आया। लेकिन सासाराम का अशोक शिलालेख इतना महत्वपूर्ण है कि ब्रिटिश शासन के समय ही इसे संरक्षित धरोहर घोषित कर दिया गया था।

सम्राट अशोक शिलालेख सासाराम का ऐतिहासिक सरकारी अभिलेख
सासाराम के अशोक शिलालेख से संबंधित ऐतिहासिक सरकारी अभिलेख

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की अधीक्षक गौतमी भट्टाचार्य ने बताया था कि सम्राट अशोक के इस महत्वपूर्ण लघु शिलालेख को ब्रिटिश शासन के दौरान वर्ष 1917 में संरक्षित किया गया था। इसके लिए 14 सितंबर 1917 को प्रारंभिक अधिसूचना (संख्या: बीओ 01332 ईई) और 1 दिसंबर 1917 को अंतिम अधिसूचना (संख्या: बीओ 1814 ईई) जारी की गई थी। उनके अनुसार, स्वतंत्रता के बाद एएसआई ने वर्ष 2008 में भी इसे संरक्षित स्मारक के रूप में अधिसूचित किया था।

अशोक शिलालेख सासाराम के संरक्षण और प्रशासनिक पत्राचार का दस्तावेज
अशोक शिलालेख के संरक्षण और प्रशासनिक पत्राचार का दस्तावेज

आशिकपुर की चंदनगिरि पहाड़ी की चोटी से लगभग 20 फीट नीचे एक गुफा में यह शिलालेख स्थित है। इसके पास एएसआई ने संरक्षण संबंधी एक बोर्ड भी लगाया था। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2010 में इस बोर्ड को उखाड़कर फेंक दिया गया था। इसके बाद भी यहाँ अतिक्रमण जारी रहने की बात सामने आई थी।

अशोक शिलालेख पर चूना-पुताई और गेट में ताला; मुहर्रम कमेटी से चाबी को लेकर विवाद

अशोक शिलालेख की चाबी को लेकर जिलाधिकारी और एसडीओ के पत्राचार का दस्तावेज
अशोक शिलालेख की चाबी को लेकर प्रशासनिक पत्राचार। उपलब्ध विवरण के अनुसार, जिलाधिकारी ने मुहर्रम कमेटी के जी.एम. अंसारी से चाबी प्राप्त करने के संबंध में एसडीओ को निर्देश दिए थे।

अशोक शिलालेख के चारों ओर घेराबंदी कर गेट में ताला लगाए जाने का मामला भी सामने आया था। आरोप है कि शिलालेख की लिखावट पर सफेद चूना पोत दिया गया। इसके बाद पत्थर पर हरी चादर चढ़ाकर उसे किसी सूफी संत की मजार बताया जाने लगा। वहाँ सालाना उर्स के आयोजन की बात भी सामने आई थी।

सासाराम अशोक शिलालेख विवाद से संबंधित प्रशासनिक दस्तावेज
अशोक शिलालेख विवाद से संबंधित प्रशासनिक दस्तावेज

उपलब्ध विवरण के अनुसार, दोबारा गेट लगने के बाद वर्ष 2012 से इस स्थान को कजरी बाबा की मजार कहा जाने लगा। धीरे-धीरे स्थानीय लोगों के बीच भी यह नाम प्रचलित होने लगा।

अलेक्जैंडर कनिंघम ने भी किया था सासाराम के अशोक शिलालेख का जिक्र

सासाराम के सम्राट अशोक शिलालेख से संबंधित पुरातात्विक पत्राचार
सासाराम के अशोक शिलालेख से संबंधित पुरातात्विक पत्राचार

पुरातत्वविद अलेक्जैंडर कनिंघम ने भी अपनी पुस्तक में इस शिलालेख का जिक्र किया था। मूल विवरण में नवंबर 1875 का उल्लेख मिलता है। इस शिलालेख का कई भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। करीब 20 साल पहले तक यह आम लोगों के लिए सुलभ था। लेकिन चूना-पुताई के आरोपों के बीच अब इसकी प्राचीन लिखावट के धूमिल होने की चिंता जताई जा रही है।

डॉ. राजेंद्र सिंह, शिक्षाविद व प्रोफेसर, एसपी जैन कॉलेज, सासाराम

डॉ. राजेंद्र सिंह, शिक्षाविद और प्रोफेसर, एसपी जैन कॉलेज सासाराम

कई बार सरकार को पत्र लिखकर दी गई जानकारी: एसपी जैन कॉलेज के हिंदी विभागाध्यक्ष और क्षेत्र की पौराणिक गतिविधियों पर शोध कर रहे डॉ. राजेंद्र सिंह के अनुसार, वर्ष 2002 में कुछ लोगों ने इस स्थान पर अतिक्रमण कर ‘कजरिया बाबा’ की मजार बना दी थी। उन्होंने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने इस संबंध में बिहार सरकार और स्थानीय प्रशासन को कई बार पत्र लिखा, लेकिन कोई कारगर कदम नहीं उठाया जा सका।

अशोक शिलालेख विवाद: तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष सम्राट चौधरी ने की थी प्रदर्शन की घोषणा

सासाराम अशोक शिलालेख से संबंधित वर्ष 2008 का सरकारी अभिलेख
सासाराम के अशोक शिलालेख से संबंधित वर्ष 2008 का सरकारी अभिलेख

इस विवाद को लेकर तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष, बीजेपी नेता और पूर्व मंत्री सम्राट चौधरी ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि सासाराम की चंदन पहाड़ी पर स्थित सम्राट अशोक के शिलालेख पर कब्जा कर मजार बना ली गई है। उन्होंने इस मामले में सरकार से कार्रवाई की माँग की थी।

सम्राट चौधरी ने स्थानीय नेताओं के साथ सासाराम में प्रदर्शन करने की बात कही थी। उनकी माँग थी कि इस राष्ट्रीय धरोहर को विवाद से मुक्त कराकर इसका संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि माँग पूरी नहीं होने पर वे अनिश्चितकालीन प्रदर्शन करेंगे।

संपादकीय नोट: यह रिपोर्ट 1 अक्टूबर 2022 को प्रकाशित जानकारी और उस समय उपलब्ध दस्तावेजों एवं बयानों पर आधारित है। इसमें वर्णित आरोप, पदनाम और घटनाएँ उसी समय के संदर्भ में प्रस्तुत की गई हैं।

Subscribe to our newsletter

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.

Sasaram Ki Galiyan
Sasaram Ki Galiyanhttps://www.sasaramkigaliyan.com
Your City. Your Stories. Your Voice. Rooted in the heart of Sasaram, Sasaram Ki Galiyan brings local stories, unheard voices, and news that matters—from the streets of Sasaram to the heart of India. Rooted in Sasaram. Connected to the Nation.
- Advertisment -spot_img

Most Popular