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सासाराम-आरा और डेहरी-रोहतास छोटी लाइन की सुनहरी यादें, आरंभ से अंत तक | Ara Sasaram Light Railway, Dehri Rohtas Light Railway | Part 1

कभी इन पटरियों पर सिर्फ़ रेलगाड़ी नहीं, लोगों के सपने भी दौड़ा करते थे। हर स्टेशन पर कोई किसी का इंतज़ार करता था, हर सफ़र अपने साथ एक कहानी लेकर चलता था। वक़्त बदला, पटरियाँ ख़ामोश हो गईं, रेल की सीटी भी थम गई। मगर कुछ सफ़र इतिहास के पन्नों में नहीं, लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।

भारतीय रेलवे, जिसकी शुरुआत 1853 में हुई थी, तब से राष्ट्र का अभिन्न अंग रहा है। ब्रिटिश सरकार ने रेल और सड़क परिवहन प्रणाली के विकास पर पर्याप्त ध्यान दिया। आर्थिक, राजनीतिक और सैन्य दृष्टि से रेलवे महत्वपूर्ण रहा है। नई रेलवे लाइनों ने भारत के विभिन्न हिस्सों को एक साथ बांध दिया। इसने लोगों और इलाकों को पहले से कहीं अधिक करीब ला दिया। नई रेल लाइनों ने दिलों की दूरी भी कम की। इसी इतिहास की एक यादगार कड़ी है Ara Sasaram Light Railway (आरा-सासाराम लाइट रेलवे)।

Table of Contents

आरा सासाराम और डेहरी रोहतास रेलवे | Ara Sasaram Light Railway, Dehri Rohtas Light Rail

Dehri Rohtas Light Rail पुरानी नैरो गेज रेलगाड़ी डालमियानगर
डालमियानगर में खड़ी “डेहरी रोहतास छोटी लाइन” की रेलगाड़ी। कुछ वर्षों पहले सरकार इसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन (मुगलसराय) पर सजाने के लिए ले गई। | फोटो साभार: LG Marshal

20वीं सदी में बिहार के पुराने शाहाबाद जिले में दो छोटी रेल प्रणालियों की शुरुआत हुई थी। एक है आरा-सासाराम लाइट रेलवे और दूसरी है डेहरी-रोहतास लाइट रेलवे। डेहरी-रोहतास रेलवे के बारे में हम लोग बाद में चर्चा करेंगे। फिलहाल सासाराम और आरा के बीच दौड़ने वाली आरा-सासाराम लाइट रेलवे पर प्रकाश डालते हैं।

आरा सासाराम छोटी लाइन

Ara Sasaram Light Railway पुरानी छोटी लाइन सासाराम स्टेशन
सासाराम स्टेशन पर खड़ी आरा सासाराम छोटी लाइन की रेलगाड़ी | फोटो साभार: LG Marshal

आरा-सासाराम लाइट रेलवे (Ara Sasaram Light Railway – ASLR) दक्षिण बिहार के यात्रियों के लिए एक लोकप्रिय नैरो गेज रेल नेटवर्क था। 1914 में शुरू हुई यह रेलवे ईस्ट इंडियन रेलवे की दो प्रमुख लाइनों को जोड़ती थी। आरा-सासाराम लाइट रेलवे ने 1978 में अपनी अंतिम यात्रा पूरी की। आरा-सासाराम लाइट रेलवे ने दक्षिण बिहार के लोगों को 64 साल तक सेवा दी। एक समय में यह रेल नेटवर्क भोजपुरी जीवनशैली का हिस्सा था।

कई गाँवों में इस रेल पर गीत भी बनाए गए थे। यह निजी स्वामित्व वाला रेल नेटवर्क था। मार्टिन और बर्न से जुड़ी इस रेल सेवा ने लोगों को छह दशक से अधिक समय तक सेवा दी। 1950 से 1970 का दौर इस रेल नेटवर्क के लिए गौरवशाली समय था।

आवश्यकता आविष्कार की जननी होती है

हर लंबी यात्रा की शुरुआत छोटे कदमों से होती है। भारतीय संदर्भ में नैरो गेज का अर्थ है 1 मीटर से छोटा कोई भी गेज। ऐसे गेजों में 2 फीट (610 मिमी) और 2 फीट 6 इंच (762 मिमी) शामिल हैं। भारत में पहली 2 फीट 6 इंच (762 मिमी) रेलवे का निर्माण 1863 में गायकवाड़ के बड़ौदा राज्य रेलवे में किया गया था। 1897 में बरसी लाइट रेलवे खोली गई। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल भारतीय पर्वतीय रेलवे, विशेषकर 1881 में शुरू हुई दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, इस विरासत के पर्यटन और ऐतिहासिक महत्व को भी दर्शाती है।

बिहार का शाहाबाद जिला, जिसका मुख्यालय आरा में था, पश्चिमी बिहार का एक भोजपुरी भाषी जिला था। यह उत्तर प्रदेश से लगती बिहार की पश्चिमी सीमा पर स्थित था। पुराना शाहाबाद जिला अब भोजपुर, रोहतास, कैमूर और बक्सर, इन चार जिलों में विभाजित है।

शाहाबाद जिला बिहार का धान उत्पादक क्षेत्र था, इसलिए राज्य में इसका आर्थिक महत्व था। शाहाबाद से राज्य के अन्य हिस्सों में बड़े पैमाने पर चावल भेजा जाता था। यद्यपि परिवहन के विभिन्न साधन व्यापार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, रेलवे बड़ी मात्रा में माल ढुलाई करने की क्षमता के कारण प्रमुख माध्यम रहा है।

भोजपुर और रोहतास में पहले से था रेल नेटवर्क

तत्कालीन शाहाबाद जिले में आरा, बिहिया, बक्सर और डुमराँव जैसे व्यापार केंद्र पहले से रेल नेटवर्क से जुड़े थे। इसी जिले के मोहनिया, कुदरा, सासाराम और डेहरी जैसे शहर व बाजार भी रेल नेटवर्क से जुड़े थे।

आरा सासाराम छोटी लाइन 1946 पीरो रेलवे स्टेशन
पीरो स्टेशन पर सन् 1946 ई. में खड़ी आरा सासाराम छोटी लाइन की रेलगाड़ी | फोटो साभार: LG Marshal

इसलिए ब्रिटिश सरकार ने तत्कालीन शाहाबाद जिले के गढ़ नोखा, बिक्रमगंज, हसन बाजार और पीरो जैसे बाजारों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का विचार किया। आरा और सासाराम के बीच की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है।

आरा और सासाराम में पहले से बड़े रेलवे स्टेशन थे

आरा मुगलसराय-पटना ब्रॉड गेज लाइन पर था और सासाराम ग्रैंड कॉर्ड (मुगलसराय-हावड़ा) लाइन पर एक रेलवे स्टेशन था। चावल जैसे सामान और यात्रियों के परिवहन के लिए भी आरा और सासाराम को जोड़ने की आवश्यकता थी। इसी रेलखंड से जुड़ी बाद की योजनाओं के बारे में हमारी सासाराम रेलवे फ्लाईओवर संबंधी रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं।

आरा सासाराम लाइट रेलवे के लिए चावल का व्यापार था मुख्य कारण

आरा सासाराम छोटी लाइन नोखा स्टेशन वर्ष 1943
नोखा स्टेशन पर सन् 1943 ई. में खड़ी आरा सासाराम छोटी लाइन की रेलगाड़ी | फोटो साभार: LG Marshal

चावल के व्यापार के लिए गढ़ नोखा, बिक्रमगंज, हसन बाजार और पीरो जैसे बाजार महत्वपूर्ण थे। इसलिए 20वीं सदी की शुरुआत में सरकारी अधिकारियों ने आरा और सासाराम के बीच रेलवे लाइन की आवश्यकता महसूस की थी।

मार्टिन्स लाइट रेलवे के भारत में कई रेल नेटवर्क थे

मार्टिन्स लाइट रेलवे भारत में रेल सेवाओं का संचालन करने वाला एक निजी समूह था। यह पहले से ही संयुक्त प्रांत और बंगाल में नैरो गेज रेल नेटवर्क का संचालन कर रहा था। इसलिए इसे आरा और सासाराम के बीच रेल नेटवर्क बनाने और संचालित करने का अवसर मिला।

निर्माण कार्य का ब्योरा

रेल नेटवर्क के लिए सरकार द्वारा 1901 ई. में भूमि का अधिग्रहण किया गया था। 15 अक्टूबर, 1909 को तत्कालीन शाहाबाद जिला बोर्ड और मार्टिन एंड कंपनी लिमिटेड के बीच आरा-सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड की ओर से एक समझौता हुआ। इस कंपनी का गठन आरा और सासाराम के बीच ट्रामवे या लाइट रेलवे के निर्माण और संचालन के लिए किया जाना था। यह समझौता कलकत्ता उच्च न्यायालय के 1979 के निर्णय में भी दर्ज है।

आरा सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड बनकर तैयार

19 अक्टूबर, 1909 को आरा-सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड का कंपनी अधिनियम, 1866 के तहत एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी के रूप में पंजीकरण हुआ। इसका पंजीकृत कार्यालय नंबर 12, मिशन रो, तत्कालीन कलकत्ता में था।

आरा-सासाराम लाइट रेलवे लिमिटेड की अधिकृत पूँजी 22,00,000 रुपये थी। कंपनी ने प्रत्येक 100 रुपये के शेयर जारी किए। अधिकृत पूँजी को 100 रुपये के 22,000 शेयरों में विभाजित किया गया था। कंपनी ने अपने कुछ शेयर आम जनता को भी बेचे।

Ara Sasaram Light Railway आरा स्टेशन वर्ष 1970
आरा स्टेशन पर सन् 1970 ई. में खड़ी आरा सासाराम छोटी लाइन की रेलगाड़ी | फोटो साभार: LG Marshal

17 जुलाई, 1910 को शाहाबाद के तत्कालीन जिला बोर्ड और आरा-सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड के प्रवर्तक मार्टिन एंड कंपनी लिमिटेड, कलकत्ता के बीच ट्रामवे या लाइट रेलवे के निर्माण का समझौता हुआ। आरा से सासाराम तक इस रेल सेवा का संचालन भाप के इंजनों से किया जाना था।

आरा और सासाराम के बीच की सड़क जिला बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आती थी। 15 अक्टूबर, 1909 के अनुबंध की शर्तों के अनुसार आरा-सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड का गठन रेल नेटवर्क के निर्माण और आवश्यक भूमि की व्यवस्था के लिए किया गया था।

आरा सासाराम लाइट रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण

Ara Sasaram Light Railway का ऐतिहासिक रेलमार्ग मानचित्र
आरा-सासाराम लाइट रेलवे का ऐतिहासिक मानचित्र (भारतीय रेलवे द्वारा विशेष अनुरोध पर “Sasaram Ki Galiyan” को उपलब्ध कराया गया)

रेल मार्ग के लिए सासाराम के निकट सलेमपुर, कुराईच (गौरक्षणी), शरीफाबाद, रसूलपुर और महद्दिगंज गाँवों की भूमि सहित कई स्थानों पर भूमि का अधिग्रहण किया गया था।

इसके बाद भूमि अधिग्रहण की योजना 28 सितंबर, 1910 के राजपत्र में प्रकाशित हुई। 19 अगस्त, 1936 को शाहाबाद के जिला बोर्ड और आरा-सासाराम लाइट रेलवे कंपनी लिमिटेड के बीच एक पूरक समझौता हुआ,

जिसके तहत दोनों पक्षों ने लाभ एवं हानि की गणना की विधि से संबंधित मूल समझौते के एक खंड में संशोधन पर सहमति व्यक्त की थी। आरा-सासाराम लाइट रेलवे (बिहार) और बारासात-बशीरहाट लाइट रेलवे (बंगाल), दोनों मार्टिन एंड कंपनी से जुड़ी रेल सेवाओं की शुरुआत 1914 में हुई थी।

Ara Sasaram Light Railway बिक्रमगंज स्टेशन 1948
बिक्रमगंज स्टेशन पर सन् 1948 ई. में खड़ी आरा सासाराम छोटी लाइन की रेलगाड़ी | फोटो साभार: LG Marshal

नोट : इस आर्टिकल पर पाठकों की प्रतिक्रिया अच्छी रही तो हर शनिवार को हम इसका अगला भाग भी लेकर आएँगे। सासाराम आरा छोटी लाइन और डेहरी रोहतास छोटी लाइन पर संपूर्ण जानकारियाँ 6 से 7 भागों और 18 से 20 हजार शब्दों में “सासाराम की गलियाँ” उपलब्ध कराएगी। हमें सिर्फ आपका सहयोग और प्यार चाहिए।

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