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मांझर कुंड में जुटे हजारों सैलानी, रक्षाबंधन के बाद क्यों खास है यह रविवार? | Manjhar Kund 2021

रक्षाबंधन बीत जाता है, मगर रिश्तों की रौनक बाकी रहती है। कैमूर की पहाड़ियों में फिर सजती है अपनों की महफ़िल। कहीं लिट्टी-चोखे की खुशबू, कहीं झरनों का मधुर संगीत, मांझर कुंड में यह रविवार सिर्फ पिकनिक नहीं, यादों का उत्सव बन जाता है।

रक्षाबंधन के अगले रविवार को मांझर कुंड (Manjhar Kund) में हर वर्ष हजारों सैलानी पिकनिक मनाने जुटते हैं। आज भी यही मौका है। मतलब, आज 29 अगस्त 2021 को रक्षाबंधन के ठीक अगले रविवार का दिन है। इस मौके पर दूर-दराज से लोग खाने के बर्तनों और सामग्रियों के साथ अपने पसंदीदा पिकनिक स्पॉट मांझर कुंड में पहुंचे हुए हैं।

सासाराम की कैमूर पहाड़ियों के बीच स्थित मांझर कुंड में आज रौनक देखने लायक है। कोई परिवार के साथ पहुंचा है, तो कोई दोस्तों की टोली लेकर आया है। रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ सुकून भरे पल बिताने का यह अवसर हर उम्र के लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।

Manjhar Kund Picnic 2021 - मांझर कुंड में जुटे सैलानियों की भीड़
मांझर कुंड में सैलानियों की भीड़

जगह-जगह अपने ग्रुप के लोगों के साथ सैलानी मुर्गा-भात, लिट्टी-चोखा और लिट्टी-मुर्गा का आनंद ले रहे हैं। जबकि कुछ लोग घर से रेडीमेड खाना भी लेकर पहुंचे हुए हैं।

कहीं बर्तन सजाए गए हैं, तो कहीं खाने-पीने की तैयारियां चल रही हैं। अपने लोगों के साथ बैठकर मनपसंद भोजन का आनंद लेना इस पिकनिक की खास पहचान है। ऐसे मौके पर सिर्फ खाना ही महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि साथ बैठने, बातचीत करने और अपनों के साथ समय बिताने की खुशी भी कुछ अलग होती है।

मांझर कुंड सासाराम में पिकनिक मनाते सैलानी - Manjhar Kund Waterfall
मांझर कुंड में पिकनिक मनाते सैलानी

यहां खुशी का माहौल है। रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी से ब्रेक लेकर सैलानी आज एन्जॉय करने अपने सगे-संबंधियों के साथ विंध्य पर्वत शृंखला की कैमूर पहाड़ियों के अंतर्गत सासाराम स्थित मांझर कुंड में पहुंचे हुए हैं।

पहाड़ियों की हरियाली, बहती जलधाराएं और प्राकृतिक वातावरण इस जगह की खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। यही कारण है कि बरसात के मौसम में मांझर कुंड प्रकृति प्रेमियों और पिकनिक मनाने वालों के लिए खास आकर्षण बन जाता है।

बिहार पर्यटन विभाग भी मांझर कुंड और धुआं कुंड जलप्रपात को रोहतास जिले के महत्वपूर्ण प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में शामिल करता है। कैमूर पहाड़ियों की इन जलधाराओं और आसपास के प्राकृतिक दृश्यों की खूबसूरती मानसून में विशेष रूप से निखर उठती है।

Manjhar Kund Sasaram - मांझर कुंड में प्रकृति का आनंद लेते सैलानी
सासाराम स्थित मांझर कुंड में एन्जॉय करते सैलानी

सिख और हिंदू धर्म के लिए खास है मांझर कुंड (Manjhar Kund)

मांझर कुंड और आसपास का यह पहाड़ी क्षेत्र प्राचीन काल से ही साधु-संतों और ऋषि-मुनियों की तपोस्थली रहा है। यहां आज भी कई संतों के आश्रमों की इमारतें, मंदिर इत्यादि देखे जा सकते हैं। प्राकृतिक सुंदरता के साथ इस क्षेत्र की अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान भी है।

मांझर कुंड के पास स्थित धुआं कुंड में प्राचीन शिव मंदिर और साधना से जुड़ी गुफाएं भी हैं। इन धार्मिक स्थलों के बारे में अधिक जानकारी के लिए धुआं कुंड सासाराम का इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता भी पढ़ सकते हैं।

धुआं कुंड सासाराम में स्थित प्राचीन शिव मंदिर - Dhuan Kund Temple
धुआं कुंड में स्थित प्राचीन शिव मंदिर

इन पहाड़ियों के बीच मौजूद आश्रम और गुफाएं इस क्षेत्र के धार्मिक महत्व की याद दिलाते हैं। यहां आने वालों के लिए प्रकृति और आस्था, दोनों का अपना अलग आकर्षण है।

धुआं कुंड की प्राचीन गुफा - ऋषि मुनियों की तपोस्थली Dhuan Kund Sasaram
धुआं कुंड में स्थित यह गुफा ऋषि-मुनियों की तपोस्थली है

सासाराम के सिख समाज के लोग यहां तीन दिनों तक तीर्थ के रूप में समय बिताया करते थे। इस मौके पर गुरु ग्रंथ साहिब भी लाया जाता था। यह परंपरा मांझर कुंड को केवल पिकनिक स्थल ही नहीं, बल्कि सिख समुदाय की धार्मिक स्मृतियों से जुड़ा स्थान भी बनाती है।

बिहार पर्यटन विभाग की जानकारी में भी मांझर कुंड में गुरु ग्रंथ साहिब को ले जाने और सिख समुदाय के लोगों के तीन दिनों तक यहां प्रवास करने की पुरानी परंपरा का उल्लेख मिलता है। रक्षाबंधन के बाद पड़ने वाले पहले रविवार को मेले की परंपरा भी इसी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा रही है।

मांझर कुंड पिकनिक मेला 2021 - Manjhar Kund में मौज मनाते सैलानी
मांझर कुंड में मौज मनाते सैलानी

लेकिन धीरे-धीरे मांझर कुंड पर दस्युओं व असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगने लगा। खाने-पीने वाले लोगों की भीड़ भी बढ़ने लगी। स्थानीय विवरणों के अनुसार, इन परिस्थितियों के कारण गुरु ग्रंथ साहिब को यहां लाने की पुरानी परंपरा बंद हो गई। अब उसे इस आयोजन के लिए मांझर कुंड नहीं लाया जाता, बल्कि सासाराम के गुरुद्वारे में ही रखा जाता है।

समय के साथ मांझर कुंड की पहचान एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल के रूप में और मजबूत होती चली गई। हालांकि, इस स्थान के प्राकृतिक सौंदर्य के पीछे छिपे धार्मिक इतिहास और पुरानी परंपराओं को भी याद रखना जरूरी है।

युवाओं और वयस्कों में उत्साह

Manjhar Kund Picnic - सासाराम के मांझर कुंड में आनंद लेते युवा और सैलानी
सासाराम स्थित मांझर कुंड में एन्जॉय करते सैलानी

मांझर कुंड जलप्रपात की प्राकृतिक छटा के पास युवाओं एवं वयस्कों में पिकनिक के लिए खासा उत्साह रहता है। रोहतास जिले के सासाराम के अलावा अन्य जगहों से भी लोग हाथ में बर्तन, गैस चूल्हा व अन्य सामान लेकर बाइक और चारपहिया वाहनों से मांझर कुंड जलप्रपात के पास पिकनिक मनाने पहुंचते हैं।

रक्षाबंधन के बाद आयोजित होने वाला यह पारंपरिक पिकनिक मेला लोगों को अपने परिवार, मित्रों और सगे-संबंधियों के साथ समय बिताने का अवसर देता है। प्राकृतिक वातावरण के बीच सामूहिक भोजन और मेल-मिलाप इस आयोजन की सबसे खास बातों में शामिल हैं।

मांझर कुंड की प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और यहां पहुंचने के रास्ते के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो हमारी विशेष रिपोर्ट प्रकृति का मधुर संगीत सुनना है तो चले आइए मांझर कुंड | Manjhar Kund Waterfall जरूर पढ़िए।

बरसात के दौरान जलप्रपात का आनंद लेते समय सुरक्षा का ध्यान रखना भी जरूरी है। फिसलन भरी चट्टानों, गहरे पानी और तेज बहाव वाली जगहों से दूरी बनाए रखें। पिकनिक के बाद कचरा अपने साथ वापस ले जाएं, ताकि इस प्राकृतिक धरोहर की खूबसूरती बनी रहे।

मांझर कुंड की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यहां प्रकृति के साथ-साथ लोगों के मेल-मिलाप की पुरानी परंपरा भी जीवित है। इसीलिए रक्षाबंधन के बाद आने वाला यह रविवार सासाराम और आसपास के सैलानियों के लिए इतना खास बन जाता है।

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