HomeRohtasSasaram divisionमाँ ताराचण्डी धाम: आस्था, चमत्कार और 51 शक्तिपीठों की पौराणिक कथा |...

माँ ताराचण्डी धाम: आस्था, चमत्कार और 51 शक्तिपीठों की पौराणिक कथा | Tarachandi Dham

जहाँ कैमूर की पहाड़ियाँ माँ की ममता का आँचल बन जाती हैं, जहाँ हर झुका हुआ सिर अपनी अनकही व्यथा सुना जाता है। वहाँ पत्थरों में इतिहास है, हवाओं में आस्था की गूँज, और हर श्रद्धालु के हृदय में बसती हैं माँ ताराचण्डी।

बिहार राज्य के रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम में कैमूर पहाड़ी की प्राकृतिक गुफा में स्थित माँ ताराचण्डी देवी का मंदिर (Tarachandi Dham) सासाराम नगर से लगभग 5 किलोमीटर दक्षिण में और सम्राट अशोक के शिलालेख से लगभग 1 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ चंडी देवी मंदिर के पास चट्टान पर सासाराम के प्राचीन राजा प्रताप धवल का एक शिलालेख भी है। रोहतास जिला प्रशासन के अनुसार, यह शिलालेख 12वीं शताब्दी के खरवार वंश के शासक प्रताप धवलदेव से संबंधित है। मंदिर परिसर में माँ तारा और सूर्य की प्राचीन प्रतिमाओं तथा अग्नि की खंडित प्रतिमा का भी उल्लेख मिलता है। यहाँ हिंदू, सिख, बौद्ध और जैन श्रद्धालु भी बड़ी संख्या में पूजा करने आते हैं। इसलिए यह एक सुंदर धार्मिक स्थल बन गया है। चारों तरफ पहाड़ों, झरनों और जलस्रोतों के बीच स्थित ताराचंडी मंदिर का मनोरम वातावरण मन मोह लेता है।

Tarachandi Dham Sasaram में माँ ताराचण्डी देवी का मुख्य मंदिर
Main Temple Tarachandi Dham

यह भारत के 51 प्रमुख शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। अपनी मनोकामनाओं के पूरी होने की लालसा में दूर-दूर से यहाँ भक्त आते हैं। माँ ताराचण्डी के दर्शन के लिए नवरात्रि में श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। कथाओं, ग्रंथों और प्राचीन मान्यताओं के अनुसार, यहाँ माता के तारा स्वरूप की पूजा होती है। वैसे तो यहाँ सालभर भक्तों का आना लगा रहता है, लेकिन नवरात्र में यहाँ पूजा-अर्चना का विशेष महत्व होता है। श्रद्धालुओं की आस्था में माँ ताराचण्डी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि मनोकामनाओं और विश्वास से जुड़ा पवित्र स्थल है।

नवरात्रि में माँ ताराचण्डी धाम सासाराम में दर्शन के लिए आए श्रद्धालु
Devotees in Navratri

नवरात्र में दूर-दराज से यहाँ भक्तों का आना होता है। कहा जाता है कि यहाँ आने वालों की हर मनोकामना माता रानी पूरी करती हैं। इसलिए लोग इन्हें मनोकामना सिद्धि देवी भी कहते हैं। सासाराम नगर से 5 किलोमीटर दक्षिण में स्थित इस मंदिर के प्रति यहाँ के लोगों में गहरी श्रद्धा और विश्वास है। नवरात्र में माँ दुर्गा के आठवें रूप की पूजा होती है। अष्टमी को माँ के दरबार में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का ताँता लगा रहता है। दूर-दराज से आए लोग माँ के दरबार में माथा टेकने के बाद माँ से आशीर्वाद के साथ-साथ सुख-समृद्धि की भी कामना करते हैं। माँ ताराचंडी विंध्य पर्वत की कैमूर पर्वत शृंखला में विराजमान हैं। भारत के 51 शक्तिपीठों की परंपरा में माँ ताराचंडी शक्तिपीठ का प्रमुख स्थान माना जाता है।

माँ ताराचण्डी धाम (Tarachandi Dham) और कथा

Tarachandi Dham Sasaram मंदिर परिसर और कैमूर पहाड़ियों का विस्तृत दृश्य
Wide View of Temple Premises
इस शक्तिपीठ के बारे में एक प्राचीन किंवदंती है कि माता सती के तीन नेत्रों में से दायाँ नेत्र भगवान श्री विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित होकर यहीं गिरा था, जिसे तारा शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि विश्वामित्र ने इस पीठ का नाम तारा रखा था। कहा जाता है कि यहीं पर परशुराम ने सहस्रबाहु को पराजित कर माँ तारा की उपासना की थी। आपको बताते चलें कि इसी सहस्रबाहु और परशुराम के नामों से मिलकर शहर का नाम सहस्राम (बाद में सहसराम और अब सासाराम) बनने की स्थानीय किंवदंती भी प्रचलित है। माँ ताराचंडी इस शक्तिपीठ में बालिका के रूप में प्रकट हुई थीं और यहीं पर चंड का वध कर चंडी कहलाई थीं, ऐसी धार्मिक मान्यता है।

Subscribe to our newsletter

To be updated with all the latest news, offers and special announcements.

Sasaram Ki Galiyan
Sasaram Ki Galiyanhttps://www.sasaramkigaliyan.com
Your City. Your Stories. Your Voice. Rooted in the heart of Sasaram, Sasaram Ki Galiyan brings local stories, unheard voices, and news that matters—from the streets of Sasaram to the heart of India. Rooted in Sasaram. Connected to the Nation.
- Advertisment -spot_img

Most Popular