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डेहरी की 155 साल पुरानी ऐतिहासिक धूप घड़ी, जहाँ सूरज की रोशनी बताती है समय | Dhoop Ghadi Dehri On Sone

वक़्त बदल गया, ज़माना बदल गया, घड़ियों की दुनिया में तकनीक का ख़ज़ाना बदल गया। मगर डेहरी की यह धूप घड़ी आज भी बीते दौर की कहानी कहती है, जहाँ समय बताने के लिए सूरज ही काफ़ी हुआ करता था।

Dhoop Ghadi Dehri On Sone : आधुनिक युग में जहाँ बाजार में सैकड़ों कंपनियों की ब्रांडेड घड़ियाँ छाई हुई हैं, वहीं सासाराम/रोहतास जिले के डेहरी-ऑन-सोन में आज भी लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुरानी धूप घड़ी का उपयोग उस रास्ते से आने-जाने वाले लोग समय देखने के लिए करते हैं।

कोणार्क मंदिर की तरह है धूप घड़ी

जिस तरह कोणार्क मंदिर के पहियों की छाया से समय का अंदाजा लगाया जाता है, उसी तरह डेहरी-ऑन-सोन में अंग्रेजों द्वारा स्थापित धूप घड़ी भी सूर्य की रोशनी से काम करती है।

सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल में है धूप घड़ी

Dhoop Ghadi Dehri On Sone - 1871 की ऐतिहासिक धूप घड़ी, डेहरी रोहतास
धूप घड़ी, डेहरी-ऑन-सोन (रोहतास)

यह धूप घड़ी डेहरी स्थित सिंचाई यांत्रिक प्रमंडल में मौजूद है। यह घड़ी आज भी स्थानीय लोगों के समय देखने के काम आती है।

अंग्रेजों ने बनवाई थी यह घड़ी

सन् 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह के कुछ वर्ष बाद से ही डेहरी की अंग्रेज सैनिक छावनी में हलचल बढ़ने लगी थी। अंग्रेजों को अपने वैश्विक अनुभवों से यह बात बखूबी मालूम थी कि बगावत के बाद विकास कार्यों को भी शासन के हथकंडे के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अंग्रेज फौजी इंजीनियर डिकेंस के नेतृत्व में सासाराम, डेहरी, भोजपुर और बक्सर में एक साथ विकास के कई काम शुरू हुए। डेहरी में सोन नदी पर बांध का निर्माण, नहरों की खुदाई और एक अभियांत्रिकी वर्कशॉप के काम सक्रिय थे। इसी दौर में तकनीकी प्रशिक्षण की व्यवस्था भी विकसित हुई।

धूप घड़ी डेहरी सासाराम रोहतास - ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक धरोहर
धूप घड़ी डेहरी, सासाराम (रोहतास)

काम की प्राथमिकता समय के साथ जुड़ी थी, तो उन्होंने कामगारों के लिए धूप घड़ी का भी निर्माण कराया, जिसके पूरा होने के 150 वर्ष से अधिक समय बीत चुका है।

Dhoop Ghadi Dehri On Sone: सन् 1871 में बनी थी धूप घड़ी

बता दें कि यह घड़ी ब्रिटिश शासनकाल में बनाई गई थी। 1871 में स्थापित यह घड़ी बिहार की एक ऐतिहासिक धूप घड़ी है, जिससे सूर्य के प्रकाश और छाया के अनुसार समय का पता चलता है।

इसी से दिन होता शुरू… इसी पर होता था खत्म

भारत की आजादी से पहले अंग्रेजों ने सिंचाई विभाग में कार्यरत कामगारों को समय की जानकारी देने के लिए इस घड़ी का निर्माण कराया था। इसी घड़ी में समय देखकर कामगारों का दिन शुरू होता था और इसी में समय देखकर दिन का काम बंद किया जाता था।

धूप घड़ी की बनावट

धूप घड़ी के बीच में धातु की तिकोनी प्लेट लगी है। कोण के हिसाब से उसके आसपास अंक अंकित किए हुए हैं। धूप घड़ी एक ऐसा यंत्र है, जिससे दिन में समय की गणना की जाती है। इसकी त्रिकोणीय धातु की प्लेट को ग्नोमन (Gnomon) कहा जाता है, जिसकी छाया समय जानने में मदद करती है। घड़ी को एक चबूतरे पर स्थापित किया गया है।

रोमन और हिंदी में देखें समय

Sundial Dehri Rohtas - धूप घड़ी पर रोमन और हिंदी के अंक
धूप घड़ी में रोमन और हिंदी के अंक लिखे हुए हैं

धूप घड़ी (Sundial Dehri Rohtas) में रोमन और हिंदी के अंक लिखे हुए हैं। इसके माध्यम से सूर्य के प्रकाश से समय देखा जाता था। इसी वजह से इसका नामकरण धूप घड़ी हुआ। उस समय नहाने से लेकर पूरे दिन का सारा काम समय के आधार पर किया जाता था।

क्या कहते हैं इतिहासकार

सासाराम रेडियो स्टेशन में कार्यरत और के.पी. जायसवाल शोध संस्थान, पटना के शोध अन्वेषक डॉ. श्याम सुंदर तिवारी धूप घड़ी के बारे में बताते हैं कि जब घड़ी आम लोगों की पहुँच से दूर थी, तब डेहरी की धूप घड़ी का बहुत महत्व था। यांत्रिक कार्यशाला में काम करने वाले श्रमिकों को समय का ज्ञान कराने के लिए यह घड़ी अंग्रेजों द्वारा स्थापित की गई थी।

सूर्य की रोशनी से चलती है धूप घड़ी

श्याम सुंदर तिवारी ने बताया कि यह यंत्र इस सिद्धांत पर काम करता है कि दिन में जैसे-जैसे सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर जाता हुआ दिखाई देता है, उसी तरह किसी वस्तु की छाया पश्चिम से पूर्व की ओर चलती है।

1871 धूप घड़ी डेहरी - ग्नोमन की छाया से समय बताने वाला प्राचीन यंत्र
Sundial Dehri Rohtas

सूर्य की रोशनी से बनी छाया अंकित रेखाओं वाली सतह पर पड़ती है, जिससे दिन के घंटों का पता चलता है। आपको बताते चलें कि सही समय की गणना के लिए धूप घड़ी के ग्नोमन का कोण और दिशा पृथ्वी की घूर्णन धुरी के अनुरूप रखी जाती है।

संरक्षण की जरूरत है

यह घड़ी खुले में अपने जीवन के दिन गिन रही है। छोटी-सी चारदीवारी में स्थित इस घड़ी को शीशे से कवर करवाने की जरूरत है। इस घड़ी को संरक्षित करने की आवश्यकता है। अगर इसे संरक्षित नहीं किया गया, तो यह धरोहर नष्ट हो जाएगी और आने वाली पीढ़ी धूप घड़ी देखने से भी वंचित हो जाएगी।

ऐसे पहुँचें धूप घड़ी डेहरी-ऑन-सोन

धूप घड़ी डेहरी ऑन सोन जाने का मार्ग - सासाराम रोहतास पर्यटन
धूप घड़ी डेहरी-ऑन-सोन जाने का खूबसूरत मार्ग

जिला मुख्यालय सासाराम से रेल और सड़क मार्ग से डेहरी अनुमंडल का सीधा संपर्क है। आप पैसेंजर ट्रेन, बस या ऑटो से डेहरी जा सकते हैं। डेहरी पहुँचकर आप ऑटो या ई-रिक्शा से धूप घड़ी तक पहुँच सकते हैं।

धूप घड़ी डेहरी: चोरी, बरामदगी और संरक्षण का नया अध्याय

इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की चिंता बाद में सच साबित हुई। फरवरी 2022 में डेहरी की धूप घड़ी की धातु की त्रिकोणीय प्लेट, यानी ग्नोमन, चोरी हो गई थी। इसके बाद पुलिस ने इसे बरामद कर लिया। इस घटना पर धूप घड़ी के ब्लेड की चोरी और ऐतिहासिक ब्लेड की बरामदगी संबंधी हमारी विस्तृत खबरें भी पढ़ सकते हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने भी 12 फरवरी 2022 को इसकी बरामदगी की पुष्टि की थी।

इसके बाद 31 अगस्त 2026 को प्रकाशित एक स्थानीय समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, इस ऐतिहासिक धूप घड़ी को दोबारा उसके मूल स्वरूप में स्थापित कर दिया गया है। यह सुखद खबर है, लेकिन इस ऐतिहासिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुँचाने के लिए नियमित देखभाल आज भी उतनी ही जरूरी है।

डेहरी और रोहतास की अन्य ऐतिहासिक एवं पर्यटन धरोहरों के बारे में जानने के लिए सोन नदी पर बने इंद्रपुरी डैम और रोहतासगढ़ किले पर हमारे लेख भी पढ़ें।

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